प्रिय पाठकों क्याअपने सोचा है की मौत के बाद आपको क्या मिलेगा? स्वर्ग या नर्क। भागवत गीता में उल्लेख है की आपके अच्छे और बुरे कर्मो पर ही आपको मिलने वाला फल निर्भर करता है। क्या सच में मनुष्यों को मृत्यु के बाद स्वर्ग और नरक में सुख या दुःख भोगना पड़ता है। या फिर स्वर्ग और नरक मानवजाति की कल्पना मात्र है। आज के इस पोस्ट में हम जानेंगे की क्या सच में स्वर्ग और नरक होता है ?

स्वर्ग और नरक क्या होता है ?

दुनिया के सभी धर्मो में स्वर्ग और नरक का जिक्र मिलता है। स्वर्ग अर्थात वह स्थान जहां पुण्य आत्माएं रहती है। और नरक वह स्थान जहां बुरी आत्माएं रहती है। कहा जाता है मरने के बाद पापी व्यक्ति को नरक में यातनाएं देने के लिए और पुण्यात्माओं को स्वर्ग में सुख भोगने के लिए भेज दिया जाता है।हिन्दू धर्म में यमराज को मृत्यु का देवता माना गया है। मान्यता के अनुसार व्यक्ति की मृत्यु हो जाने के बाद यमदूत उसकी आत्मा को धरती से यमलोक ले जाते हैं।  वहीं जाकर उसके पाप-पुण्य का हिसाब यमराज जी स्वंय करते है। इसी आधार पर यमराज उस आत्मा को स्वर्ग या फिर नरक का स्थान प्रदान करते हैं। इसी तरह हर धर्म में यह धारणा है कि ईश्वर ने इसकी रचना की है। जहां व्यक्ति को उसके  कर्मों का फल मिलता है।

स्वर्ग और नरक की धार्मिक व्याख्या 

कुरान

इस्लाम में स्वर्ग को जन्नत कहा गया है और नरक को दोजख या जेहन्नूम। कुरान में कहा गया है की इंसानो के द्वारा किए गए पुण्य उसके पापों पर भारी पड़ जाते हैं। तो उसे जन्नत का सुख नसीब होता है और अगर गुनाहों का वजन ज्यादा हो तो उसे दोखज की सजा मिलती है। इस्लाम में नरक को आग और दण्ड का मिश्रण बताया गया है। यहां आते ही आत्माओं  को आग में झोंक दिया जाता है और बाद में उन्हें लोहे की  छड़ी से मारा जाता है।

बाइबिल

ठीक इसी तरह ईसाई धर्म के अनुसार स्वर्ग वह स्थान है जहां भगवान और फरिश्ते रहते हैं जबकि नरक में डेविल। ईसाईयो के धार्मिक ग्रन्थ बाइबिल के अनुसार जिन मृत इंसानों की आत्मा का नाम ‘बुक ऑफ लाइफ  में  नहीं पाया जाता है। उन्हें आग की झील यानि हेल में ढकेल दिया जाता है। इन सब के उलट पारसी धर्म का मानना है कि मृत्यु के बाद सभी आत्माएं स्वर्ग में ही जाती हैं। लेकिन उन्हें वहां पहुंचने में कितना समय लगता है यह उनके द्वारा किये गए पाप-पुण्यों पर निर्भर करता है।

स्वर्ग-नर्क और हिन्दू धर्म

लेकिन सभी धर्मो से इत्तर हिन्दू धर्म में बताया गया है की नरक वह नहीं जहां आपको दर्द दिया जाता है। बल्कि हिन्दू मान्यताओं के अनुसार इंसान का जीवन ही उसका नरक है। हिन्दू धर्म में ‘संसार’ एक ऐसा शब्द है जो मनुष्य के जीवन-मरण के चक्र को दर्शाता है। यदि मनुष्य पुण्य कमाएगा तो उसे स्वर्ग यानी कि मोक्ष की प्राप्ति होगी। लेकिन यदि वह पाप करेगा तो उसे संसार मिलेगा जो कि उसे जीने-मरने के जाल से कभी बाहर नहीं आने देगा।

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