दीपावली का आना अर्थात खुशियों का आगमन. ऐसे सुहाने मौसम में दीवाली का पर्व वातावरण में चार चाँद लगा देता है. इस पोस्ट में हम आपको बतायेगे की दीपावली के दिन ये दस काम जरूर करें.

01. 8 बजे से पूर्व हर हाल में स्नान कर लें. यहाँ हम आपको एक महत्वपूर्ण बात बताना चाहते हैं कि शास्त्रों में कहा गया है सुबह 4 से 5 बजे के बीच किया गया स्नान मुनि स्नान होता है जो सर्वोत्तम है. 5 से 6 के बीच किया गया स्नान देव स्नान है. 6 से 8 के बीच किया गया स्नान मानव स्नान है और 8 बजे के बाद किया गया स्नान राक्षसी स्नान है. मुनि स्नान घर में सुख, शान्ति, समृद्धि, आरोग्य लेकर आता है और व्यक्ति को विद्या, बल आदि प्रदान करता है. देव स्नान जीवन में कीर्ति, यश, संतोष, वैभव, सुख, शान्ति, धन आदि लेकर आता है. और मानव स्नान कार्य में सफलता, सौभाग्य, मंगलं और परिवार में एकता लेकर आता है. परन्तु राक्षसी स्नान अर्थात 8 बजे के बाद का स्नान हानि, दरिद्रता, परेशानियां, धन हानि, क्लेश और नकारात्मकता लेकर आता है. इसलिए साधारण दिनों में भी कभी भी 8 बजे के बाद स्नान न करें.  

02. स्नान के बाद साफ़ कपडे पहनें और अगर आपने अपने लिए शॉपिंग की है तो नए वस्त्र धारण करें. ऐसा करने से आपको पुरे दिन अच्छा महसूस होगा.

03. सुबह में बहुत अच्छे मन से घर के सभी बड़ों का चरण स्पर्श करके आशीर्वाद प्राप्त करें और विशेषकर माता पिता को आपके जीवन को बेहतर से बेहतर बनाने के लिए धन्यवाद कहें और उनका आशीर्वाद लें. घर के सभी छोटों को बहुत सारा प्रेम और शुभकामनाएं दें.

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04. दीपावली के दिन सुबह से ही केवल माँ लक्ष्मी नहीं श्री हरि भगवान को भी स्मरण करें. भगवान हरि के स्मरण से माँ लक्ष्मी बहुत प्रसन्न होती हैं और घर में अवश्य पधारती हैं. यदि आप व्यस्त हैं तो मन ही मन ‘श्रीमन नारायण’ का कीर्तन करते रहें. ऐसा करने से आपको भी अच्छा अनुभव होगा और दीवाली के शुभ दिन आप भगवान विष्णु का कीर्तन भी कर लेंगे.

05. सुबह से ही एक प्रतिज्ञा लें, कि बिल्कुल भी क्रोध नहीं करेंगे, किसी से भी कटु शब्द नहीं कहेंगे और परिवार में सबको खुश रखेंगे.

06.माँ लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर में सबके साथ मिलकर घर की फूलों से सजावट करें, द्वार पर रंगोली बनाएं और हर ओर दीपक रखें.

07. घर में मिष्ठान अवश्य बनाएं और उसका भोग लगाकर ही ग्रहण करें. दीवाली बिना मिठाई के पूरी नहीं होती तो खुद भी ढेर सारी मिठाइयां खाएं और सबको खिलाएं. यदि संभव हो तो लक्ष्मी के भोग के लिए खीर बनाएं.

08. दीपक रखते समय इन स्थानों पर दीप अवश्य रखें. सबसे पहले घर के मंदिर में जहाँ आप लक्ष्मी पूजन करेंगे. मंदिर में अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित करें और ध्यान रहे कि यह ज्योति पूरी रात जलती रहे. मुख्य द्वार पर दीपक रखें. जहाँ पीने का पानी रखा है उस स्थान पर एक दीपक रखें. तुलसी के पौधे के नीचे, शमी के वृक्ष के नीचे, और अपने घर के साथ साथ पड़ोस के घर के द्वार पर भी एक दीप जलाएं. वैसे तो दीवाली के दिन घर के हर स्थान पर दीपक रखना चाहिए परन्तु इन स्थानों पर दीप प्रज्वलित करने का विशेष महत्त्व है. ऐसी भी मान्यता है कि दीपावली के दिन पितरों के लिए भी दिए जलाये जाते हैं. दीपक, कंडील, आदि जलाने का यह भी महत्त्व माना गया है कि दीवाली अमावस्या से पितरों की रात आरम्भ होती है. पितर मार्ग न भटक जाएँ इसलिए प्रकाश का प्रबंध किया जाता है. यह विशेष रूप से बंगाल में माना जाता है.

09. दीवाली की रात को जुआ खेलने का बहुत प्रचलन है. यदि इस प्रथा या जुआ खेलने की आदत को परे रखकर देखा जाए तो यह एक दुर्गुण है जिससे हमें हर हाल में दूर रहना चाहिए. दीवाली की रात जुआ खेलने की प्रथा का शास्त्रों में कहीं भी उल्लेख नहीं है और यदि इस प्रकार की कथा मिलती भी है तो उनकी पौराणिक रूप से कोई पुष्टि नहीं हुई है. इसलिए इस शुभ दिन को केवल अच्छे विचारों और अच्छे कार्यों के साथ व्यतीत करें और जुआ आदि से दूर रहें.

10. प्रयास करें कि आतिशबाज़ी बहुत कम करें और यदि आप इसके शौक़ीन नहीं हैं तो आप पर्यावरण को सुधारने में बहुत बड़ा योगदान दे रहे हैं. केवल दीवाली ही नहीं, किसी भी धर्म के किसी भी पर्व पर यदि वातावरण को हानि पहुँचती है, तो हमारा सभी से आग्रह है कि इस प्रकार के कार्यों से दूर रहें जिससे हम स्वयं को एक बेहतर जीवन दे सकें.

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