आपने महाभारत के अनेक पात्रों और उनसे जुड़े प्रसंगों के विषय में सुना होगा। पर  क्या आप जानते हैं कि पांडवों ने अपने पिता पाण्डु कि मृत्यु के बाद उनके शरीर का मांस खाया था। क्या कारण था कि पांडवों को अपने अपने मृत पिता का मांस खाना पड़ा?

महाराज पाण्डु की मृत्यु

पाण्डु की दो रानियां थी कुंती और माद्री। एक बार पाण्डु अपनी दोनों रानियों के साथ वन में गए। वहां आखेट के दौरान प्रेम मुद्रा में लीन एक मृग को बाण लग गया । तब मृग ने श्राप दिया की जब भी पाण्डु किसी के साथ सम्बन्ध बनाएंगे तब उनकी मृत्यु हो जाएगी । एक बार पाण्डु रानी माद्री के साथ वन में घूम रहे थे और अपनी काम वासना पर नियंत्रण न रख सके। जैसे ही उन्होंने माद्री के साथ सम्बन्ध बनाया उनकी मृत्यु हो गयी।

 महारानी कुंती की कथा

पुराणों में उल्लेखनीय है कि विवाह से पूर्व रानी कुंती को ऋषि दुर्वासा से वरदान प्राप्त था। जिसके परिणामस्वरूप वो किसी भी देवता का आवाह्न करके संतान प्राप्त कर सकती थीं।  पाण्डु को ज्ञात था कि वो संतान नहीं प्राप्त कर सकते। तब उन्होंने कुंती को देवताओं का आवाह्न करने का आदेश दिया। जिसकी सहायता से युधिष्ठिर, भीम,और अर्जुन प्राप्त हुए।  कुंती ने यह मंत्र माद्री को भी दिया जिसकी सहायता से माद्री ने नकुल व सहदेव को प्राप्त किया। इस प्रकार कोई भी पुत्र पाण्डु के वीर्य से प्राप्त नहीं हुआ था।  

कहा जाता है पाण्डु बहुत ही विद्वान्, ज्ञानी और कुशल थे। और वो अपने पुत्रों को भी अपनी तरह बनाना चाहते थे। उन्होंने अपने पाँचों पुत्रों को उनकी मृत्यु के पश्चात उनके शरीर के विभिन्न भाग बांटकर खाने के लिए कहा था।इसलिए पांडवों ने अपने मृत पिता का मांस खाया।

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