इसमें कोई दो राय नहीं है की भारत हमेशा से ही तकनीक के क्षेत्र में अव्वल रहा है। आज के समय में तकनीक ने जितना विकास किया है। पुरातन समय में तकनीक इससे भी कहीं अधिक विकसित थी। वर्तमान में हवा में युद्ध को परिणाम देने के लिए तकनीकी रूप से बहुत शक्तिशाली विमान तैयार किये जाते हैं।  परन्तु भारत के लिए ये कुछ नया नहीं है। यहाँ पौराणिक काल में ऐसे विमानों का निर्माण हुआ जिनके बारे में आप सोच भी नहीं सकते।इस पोस्ट में आपको कुछ ऐसे ही पौराणिक काल के शक्तिशाली विमान के बारे में जानने को मिलेगा।

 विमानों के प्रकार

महर्षि भारद्वाज द्वारा रचित ग्रन्थ ‘यंत्र सर्वस्व’ में चार प्रकार के मुख्य विमानों का वर्णन मिलता है। जिनके नाम क्रमशः त्रिपुर, रुक्म, सुन्दर और शकुन हैं। सुन्दर राकेट की आकृति लिए हुए थे और चांदी के रंग के थे। जबकि शकुन पक्षी के आकार के थे।  रुक्म विमान नुकीली आकृति लिए हुए और सुनहरे रंग के थे।  इन चार विमान के प्रकारों में अनेक विशेषताएं थीं परन्तु त्रिपुर विमान सबसे अधिक विशेष और प्रमुख थे।

त्रिपुराजीत विमान 

त्रिपुर विमान जिसे त्रिपुराजीत के नाम से भी जाना जाता है। इसे पुराणों में वायु से भी तेज़ चलने वाला विमान बताया गया है। ये विमान न केवल वायु में बल्कि धरती और जल में चलने के लिए भी उपयुक्त थे। त्रिपुर विमानों का निर्माण करने में जिन पदार्थों का प्रयोग किया गया था उनका वजन नगण्य था। और इन पदार्थों को जलाना, तोडना या नष्ट करना असंभव था।  यहाँ तक कि  जल अग्नि और वायु भी इन्हें नष्ट करते में असमर्थ थे। इसी कारण इन विमानों को पौराणिक काल के सबसे शक्तिशाली और तकनीकी रूप से बहुत विकसित विमानों की श्रेणी में रखा गया है। इन विमानों के तीन आवरण या पहिये थे। जिस कारण इन्हें त्रिपुर का नाम दिया गया। साथ ही त्रिपुर में तीन मंज़िल थी। जिसमे एक बड़ी संख्या में यात्री सफर कर सकते थे।  

पुष्पक विमान

पुष्पक विमान का नाम कौन नहीं जानता। कहा जाता है कि  यह विमान ब्रह्मा ने कुबेर को उपहार में दिया था। परन्तु रावण ने पुष्पक को कुबेर से छीन लिया था। रामायण के अनुसार रावण सीता का हरण करके इसी में लेकर आया था। और अंततः रावण का वध करके भगवान राम लक्ष्मण और सीता माँ समेत इसी से वापस अयोध्या लौटे थे।

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  इसकी विशेषता थी कि  इसमें कितने भी यात्री सवार हो जाएं परन्तु एक कुर्सी हमेशा खाली रहती थी। पुष्पक यात्रियों की संख्या और वायु के घनत्व के अनुसार अपना आकार बड़ा अथवा छोटा कर सकता था। पुष्पक विमान ग्रहों तक की भी यात्रा करने में सक्षम था। पुष्पक विमान के अनेक हिस्से सोने से बने हुए थे. यह विमान हर ऋतु के लिए बहुत ही आरामदायक और दिखने में बेहद आकर्षक था.