स्त्री को इस सृष्टि का सबसे अबूझ रचना माना गया  है।स्त्री के प्रकृति को समझना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा लगता है।ऐसा भी कहा जाता है की खुद भगवान से भी अपनी इस रचना को समझने में चूक हो जाती  है।पाठकों इस पोस्ट में मैं बताने जा रहा हूँ की स्त्री की रचना के क्या बिचित्र हुआ था।भगवान को भी स्त्री की रचना में काफी समय लगा था।देवदूत भी स्त्री की रचना में लग रहे समय को लेकर भगवान से सवाल करने लगे थे।

स्त्री रचना की कथा

दरअसल भगवान् को  स्त्री की रचना करते हुए 6 दिन बीत चुके थे|फिर भी रचना अभी अधूरी थी।यह देख देवदूतों ने भगवान से पुछा कि हे भगवान स्त्री की रचना करने में आपको इतना ज्यादा वक्त क्यों लग रहा है..? तब  भगवान  ने जवाब दिया की क्या तुमने इसके सभी गुण देखे है।ये मेरी वो रचना है जो हर हालत में डटी रहेगी। स्थिति चाहे कैसी भी हो ये सबको खुश रखेगी।अपने परिवार और बच्चो को एक सा प्यार देगी। इसमें  बीमार होने पर भी कई  घंटे काम करने की क्षमता होगी।

भगवान ने बताये स्त्री के गुण

भगवान की बातें सुनकर  देवदूत  हैरान रह गए। फिर उन्होंने पूछा की  क्या ये अपने दोनों हाथो से इतना कुछ कर सकती है।भगवान् ने जवाब दिया बिलकुल  इसलिए तो ये मेरी सबसे अध्भुत रचना कहलाएगी।ये सुन कर देवदूत ने पास जाकर रचना को हाथ से छूकर देखा। दूतों ने  कहा कि प्रभु ये तो बहुत नाज़ुक है।  भगवान ने हंस कर कहा कि  ये बाहर से नाज़ुक जरूर है पर अंदर से उतनी ही मज़बूत है। अर्थात ये कोमल है पर कमज़ोर नहीं।

इतना सुनने के बाद देवदूत इस रचना के बारे में और भी जानने को उत्सुक हो गए। देवदूतों ने भगवन से पुछा कि हे  प्रभु क्या स्त्री में सोचने की क्षमता होगी।  प्रभु ने कहा ये न केवल सोच सकेगी  बल्कि इसमें  हर समस्या से मुकाबला करने की क्षमता होगी।दरअसल देवदूत ने जब पास जाकर स्त्री के गालों को हाथ लगाया था तब उन्हें कुछ पानी जैसा प्रतीत हुआ था।उन्होंने भगवान् से पूछा कि हे भगवान् इसके गालों पर पानी जैसा क्या है ?तो भगवान् ने कहा ये इसके आंसू है।जवाब सुनकर  देवदूत  हैरान हो गए और पूछा आंसू! पर वो किसलिए ?इसके जवाब में  भगवान ने कहा कि जब ये कमज़ोर पड़ने लगेगी  तो  ये अपनी सारी पीड़ा आंसुओ के साथ बहा बहा देगी।इसके बाद ये फिर पहले की तरह मजबूत हो जाएगी। 

स्त्री की कमजोरी

अपने दुखो को भुलाने का इसके पास ये सबसे बेहतर तरीका होगा।साथ ही भगवान ने कहा कि यही इसकी ताकत होगी। देवदूत ये  सुन कर कहा भगवान आप तो महान है। इस रचना को आपने बहुत  सोच समझ कर बनाया है।फिर भगवान ने कहा ये स्त्री रूपी रचना हमेशा अपने परिवार की हिम्मत बनेगी और हर परिस्थिति में निश्छल रह कर ही समझौता करेगी। देवदूतों ने कहा भगवन आपकी रचना सम्पूर्ण है।

भगवान ने जवाब दिया कि नहीं अभी इसमें एक कमी है।और वो ये कि ये अपना ही महत्व भूल जाएगी कि वो कितनी खास है।पाठकों भगवान द्वारा बनाई इस रचना को जानिए और स्त्री का सम्मान कीजिये।