RAM NE KYUN KI THI SHUDRA KI HATYA

श्री राम : हिन्दू धर्म में मर्यादा पुरुषोतम श्रीराम चंद्र जी को सदियों से धर्म का प्रतीक माना जाता हैं | लेकिन हमारे धर्म ग्रंथों में कहीं कहीं ये भी उल्लेख मिलता है की एक ऋषि के बहकावे में आकर श्रीराम ने एक निर्दोष शूद्र की हत्या कर दी थी | तो आइये जानते है की वो शूद्र कौन था और श्रीराम ने उसकी हत्या क्यों की थी | नमस्कार दोस्तों THE DIVINE TALES पर आपका स्वागत है|

सर्वप्रथम सम्पूर्ण कथा का वर्णन वाल्मीकि रामायण में उत्तर कांड के 73-76 सर्ग में मिलता हैं | सम्पूर्ण वध की कथा इस प्रकार हैं | अयोध्या नगरी में एक दिन एक ब्राह्मण का इकलौता बेटा मर गया | उस ब्राह्मण ने लड़के के शव को लाकर राजद्वार पर रख दिया और विलाप करने लगा | बालक के पिता का आरोप था की उसके बेटे की अकाल मृत्यु राजा श्रीराम के कारण हुई है | इस बात का पता जब श्री राम को चला तो वो राजद्वार पर आये और बालक के पिता को भरोसा दिलाया की आपके बेटे के दोषी को जरूर सजा मिलेगी | इस अपराध की जांच के लिए श्री राम ने ऋषि मुनियों के साथ इस पर विचार किया | उस सभा में महर्षिनारद भी उपस्थित थे | महर्षिनारद ने कहा हे राजन द्वापर युग में भी शुद्र का तप में लीन होना महान अधर्म हैं फिर अभीतो त्रेता युग चल रहा है |

इस युग में शूद्र के तप करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता | निश्च यही आपके राज्य की सीमा में कोई बुद्धिवाला शुद्र तपस्या कर रहा हैं | उसी के कारण ब्राह्मण बालक की मृत्यु हुई हैं | इसलिए आप अपने राज्य में खोज कीजिये और जहाँ भी कोई दुष्ट कर्म होता दिखाई दे वहाँ उसे रोकने का प्रयास कीजिये | यह सुनते ही रामचन्द्र जी पुष्पक विमान पर सवार होकर अधर्मी शूद्र की खोज में निकल पड़े | बहुत खोजने के बाद दक्षिण दिशा में शैवल पर्वत के उत्तर भाग में एक सरोवर पर तपस्या करते हुए एक तपस्वी दिखा |

जो पेड़ से उल्टा लटक कर तपस्या कर रहा था | उसे देखकर श्रीराम जी तप करते हुए उस तपस्वी के पास गए और बोले उत्तम तप का पालन करते हुए ताप सतुमधन्य हो | लेकिन हे तापस क्या मैं आपसे ये पूछ सकता हूँ की आप किस कुल और जाति में उत्पन्न हुए हो आपका गोत्र क्या है | मैं दशरथ कुमार श्री राम आपका परिचय जानने के लिए ये बातें पूछ रहा हूँ | आपको किस वस्तु के पाने की इच्छा हैं | तपस्या द्वारा संतुष्ट हुए इष्ट देव से आप कौन सा वर पाना चाहते हो | स्वर्ग या कोई दूसरी वस्तु कौनसा ऐसा पदार्थ हैं जिसे पाने के लिए आप ऐसी कठोर तपस्या कर रहे हो जो दूसरों के लिए दुर्लभ हैं | तापस जिस वस्तु के लिए आप तपस्या में लगे हो | उसे मैं जानना चाहता हूँ |

कलेश रहित कर्म करने वाले भगवान का यह वचन सुन कर नीचे मस्तक कर के लटका हुआ वह तपस्वी बोला| हे श्रीराम मैं झूठ नहीं बोलूँगा | देवलोक को पाने की इच्छा से ही तपस्या में लगा हूँ | मुझे शुद्र जानिए मेरा नाम शम्बूक हैं | शूद्र का नाम सुनते ही श्रीराम के साथ आये ऋषि क्रोधित हो उठे और उन्होंने श्री राम से कहा राजन महर्षिनारद सही कह रहे थे | इसी अधर्मी शूद्र के कारण उस ब्राह्मण बालक की अकाल मृत्यु हुई है इसे दंड जरूर मिलना चाहिए | ऋषि के मुख से ऐसी बातें सुनकर श्रीराम ने अपने म्यान  से तलवार निकला और शम्बूक के सर को उसके धार से अलग कर दिया | इस प्रकार श्रीराम ने ऋषि मुनियों की बातों में आकर एक निर्दोष शूद्र की हत्या कर दी |

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