पांच महापापी

वैसे तो महाभारत के सभी पात्रों को धर्मपरायण माना जाता है । महाभारत के कई ऐसे भी पात्र हैं जिनके पापों को हमसे छुपाया गया है । हम आपको महाभारत के ऐसे ही योद्धाओं के बारे में बताएँगे जिसके पापों के बारे में आप शायद ही जानते होंगे ।महाभारत के पांच महापापी योद्धा ।

 1. भीष्म पितामह : महापापी योद्धा

 भीष्म पितामह को वैसे तो धर्म के रक्षक के रूप में जाना जाता है ।लेकिन पितामह भीष्म ने अपने जीवन काल में न चाहते हुए भी कई ऐसे पाप किये थे । जिस कारण उन्हें महाभारत युद्ध में कौरवों की ओर से युद्ध करना पड़ा ।भीष्म ने अम्बा,अम्बिका और अम्बालिका का स्वयंवर से अपहरण कर विवाह करवाने का घोर पाप किया था ।उसके बाद वो द्रौपदी के चीरहरण पर चुप रहकर पाप के भागीदार बने ।इनके आलावा उन्होंने अपने दुश्मन पांडवों को अपनी मृत्यु का राज़ बता दिया । जिससे युद्ध के नियम के हिसाब से हमारे धर्मग्रंथों में घोर पाप माना गया है ।

2.आचार्य  द्रोणाचार्य

 वैसे तो गुरु द्रोणाचार्य को धर्म पालक माना जाता है पर पुत्र और शिष्य मोह में आकर  उन्होंने कई पाप किये । पुत्र मोह के कारण गुरु द्रोणाचार्य ने अश्वश्थामा के लिए कौरवों और पांडवों को शिक्षा देने में भेदभाव किया । अपने पुत्र मोह के कारण ही गुरु द्रोण कुरुक्षेत्र से युद्ध छोड़ कर चले गए थे ।अश्वश्थामा के समझाने पर पुनः कुरुक्षेत्र में वापस आये और अंत में पुत्र मोह के कारण ही गुरु द्रोणाचार्य को अपने प्राणो से हाथ धोना पड़ा । द्रौपदी चीरहरण के समय चुप रहकर गुरु द्रोणाचार्य अधर्म के भागीदार बने । इसके लावा गुरु द्रोणाचार्य ने अर्जुन के लिए  एकलव्य से अंगूठा गुरुदक्षिणा में मांग कर घोरपाप किया था । इतना ही नहीं गुरु द्रोणाचार्य ने कुरुक्षेत्र में अभिमन्यु वध में कौरवों का साथ देकर घोर पाप किया था ।

3.अश्वश्थामा : महापापी योद्धा

अश्वश्थामा ने अपने पिता द्रोणाचार्य के शिक्षण कार्य पर संदेह करके घोर पाप किया था क्योंकि धर्म के अनुसार गुरु एवं माता पिता के किसी भी कार्य पर संदेह करना अधर्म माना गया है ।अश्वश्थामा को संदेह था की उसके पिता गुरु द्रोणाचार्य उसकी अपेक्षा अर्जुन को अधिक अश्त्र शस्त्र का ज्ञान देते हैं । इसके आलावा अश्वश्थामा ने पांडव के पांचों पुत्रों को मारने का पाप किया था । साथ ही उसने अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा की कोख पर ब्रह्मास्त्र चलाने जैसा अपराध किया था जिसके कारण अश्वश्थामा आज भी इस मृत्युलोक पर श्रापित जीवन व्यतीत कर रहा है ।

4.युधिष्ठिर : महापापी योद्धा

पांडवों में सबसे बड़े युधिष्ठिर को धर्मराज के नाम से भी जाना जाता है । लेकिन धर्मराज युधिष्ठिर ने भी कुरुक्षेत्र में गुरु द्रोणाचार्य को अश्वश्थामा के वध की झूठी सुचना देकर अपने जीवन काल का एक मात्र पाप किया था । जिस कारण युधिष्ठिर को कुछ समय के लिए नर्क में रहना पड़ा था ।

5. दुर्योधन : महापापी योद्धा

दुर्योधन ही महाभारत का एक ऐसा पात्र है जिससे कभी भी धर्मपरायण नहीं माना गया । दुर्योधन ने अपने जीवन काल में पाप ही पाप किये । जैसे की बचपन में दुर्योधन ने भीम को जहर देकर मारने की कोशिश की थी ।उसके बाद लाक्षागृह में पांडवों को जलाकर मारने की साजिश की । छलपूर्वक द्युत के जरिये पांडवों से राज छीन लिया । इतना ही नहीं भरी सभा में द्रौपदी के चीरहरण का पाप किया । अभिमन्यु को घेरकर वध करने जैसा घोर पाप दुर्योधन ने किया था ।

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