यूं तो आपने कलयुग के बारे में बहुत ही पढ़ा होगा या सुना होगा की कलयुग ऐसा होगा कलयुग वैसा होगा लेकिन आज में कलयुग से संबंधित ऐसी बातें बताने जा रहा हूँ जिसे आपने शायद ही सुना होगा|तो आइये जानते है कलयुग की इस नई कथा के बारे में, नमस्कार पाठको THE DIVINE TALES पर आप सभी का स्वागत है|

हस्तिनापुर के राजसभा में दुर्योधन से द्युत में हारने के कारण पांडवों को 12 वर्ष का वनवास और 1 वर्ष का अज्ञातवास मिला था-जैसे तैसे वनवास खत्म होने के बाद जब पांडव अज्ञातवास के लिए एक ऐसी जगह की तलाश कर रहे थे जहाँ कोई उन्हें पहचान ना पाए| उसी समय जंगल के ऊपर से गुजर रहे शनिदेव की नज़र पांडवों पर पड़ी| उन्होंने उनकी परीक्षा लेने के बारे में सोचा और पता लगाना चाहा कि पांचों पांडवों में से सबसे बुद्धिमान कौन हैं|

यह जानने के लिए शनिदेव ने एक माया महल का निर्माण किया और इस महल के हर कोने में कुछ योजन की दूरी रखी| तभी अचानक भीम की नज़र उस महल पर पड़ी और उसका मन उस महल में जाने को आतुर हो गया| युधिष्ठिर से आज्ञा लेकर भीम उस महल के पास पहुँच गए| जैसे ही भीम ने अंदर जाना चाहा तो शनिदेव जो की दरबान बने महल के दरवाज़े पर पहरा दे रहे थे, उसे अंदर जाने से रोका और कहा कि इस महल में जाने की कुछ शर्ते हैं| अगर तुम मेरी ये शर्त मानोगे तभी महल में जा पाओगे| शनिदेव ने अपनी शर्तें भीम को सुनाई जो इस प्रकार है|

पहली शर्त – महल में चार कोनो में से तुम सिर्फ एक ही कोना देख सकते हो|
दूसरी शर्त – महल के अंदर जो कुछ भी देखोगें उसे उसके मतलब सहित मुझे समझाना होगा|
तीसरी शर्त -अगर तुम नही बता पाए तो तुम्हे बंदी बना लिया जायेगा|

भीम ने अंदर जाकर जो कुछ भी देखा वो समझ नहीं पाए और बंदी बना लिए गए,भीम की तरह उसके तीन और भाई अर्जुन,नकुल और सहदेव भी महल के अंदर जाने के प्रयास में विफल रहे और बंदी बना लिए गए| इधर जब बहुत देर तक चारों भाई नहीं आए तो युधिष्ठिर को उनकी चिंता होने लगी और वो भी द्रोपदी के साथ महल में गए|दरबान से अपने भाइयों के बारे में पूछा तो दरबान ने उन्हें बताया की महल में जाने की कुछ शर्तें थी जिन्हें आपके भाई पूरा नहीं कर पाए इसलिए वे बंदी बना लिए गए हैं| दरबान की शर्ते पूरा कर युधिष्ठिर महल में बंदी बने अपने चारों भाइयों के पास पहुंचे| बंदी बने भाइयों से मिलने के बाद युधिष्ठिर ने सबसे पहले भीम से पूछा, “बताओं तुमने अंदर क्या देखा?” भीम ने बताया की “मैने देखा की वहां तीन कुएं हैं जिसमे एक कुआँ बड़ा हैं और दो छोटे हैं| जब बड़े कुएं का पानी उछलता हैं तो बराबर के दोनों छोटे कुएं भर जाते हैं| लेकिन जब दोनों छोटे कुएं में पानी उछलता हैं तो बड़े कुएं का पानी आधा ही रह जाता हैं|”

तब युधिष्ठिर ने भीम को समझाया कलयुग में एक बाप दो बेटों का पेट भर देगा| लेकिन दो बेटे एक बाप का पेट नहीं भर पाएंगे| जैसे ही युधिष्ठिर ने ये बताया भीम को छोड़ दिया गया| अब युधिष्ठिर ने अर्जुन से पूछा की उसने क्या देखा| अर्जुन ने बताया की एक खेत में एक तरफ मक्के की और दूसरी तरफ बाजरे की फसल उग हुई है| लेकिन मक्के के पौधों से बाजरे का फल और बाजरे के पौधे से मक्के का फल निकल रहा है|

तब युधिष्ठिर ने कहा यह भी कलयुग में होने वाला हैं इसका अर्थ हैं वंश परिवर्तन अर्थात ब्राह्मण के घर शुद्र कि लड़की और शुद्र के घर ब्राह्मण की लड़की ब्यहि जाएगी| युधिष्ठिर से अर्जुन के सवाल का जवाब सुन उसे भी बंदी गृह से मुक्त कर दिया गया| अब युधिष्ठिर ने नकुल से पूछा उसने क्या देखा| नकुल देखता हैं कि बहुत सारी सफ़ेद गायें अपनी बछियों के साथ वहां घूम रही हैं| लेकिन जब गायों को भूख लगती हैं तो वो अपनी बछियों का दूध पी रही थी जो की बहुत ही अजीब था|

युधिष्ठिर ने कहा की इसका अर्थ था कि कलयुग में माताएं बेटी के घर रह उन्हीं का अन्न खाएँगी| क्योंकि बेटे माँ बाप कि सेवा नहीं करेंगे| उसके बाद नकुल भी छुट गया| अंत में युधिष्ठिर ने सहदेव से पूछा कि आखिर उसने क्या देखा| सहदेव देखता है कि एक सोने की बड़ी शिला चांदी के एक सिक्के पर टिकी हुई थी जो की डगमग हिल रही थी लेकिन फिर भी गिर नहीं रही थी| युधिष्ठिर ने सहदेव को बताया कि कलयुग में पाप धर्म को दबाता रहेगा| लेकिन फिर भी धर्म ख़त्म नही होगा –यह सुन सहदेव को भी मुक्त कर दिया गया| तो इस प्रकार शनिदेव ने परीक्षा के द्वारा जाना कि पांचों पांडवों में युधिष्ठिर सबसे अधिक बुद्धिमान हैं| उन्होंने जो भी उत्तर दिए कलयुग में आज वो सब घटित हो रहा हैं| आज के पोस्ट में इतना ही आपको हमारी ये पोस्ट अगर अच्छी लगी हो, तो लाइक करें साथ ही अपने दोस्तों के साथ शेयर करे—-