Lord Krishna

बहुत समय पहले की बात है किसी नगर में एक लड़की थी। उसका परिवार बड़ा ही धार्मिक प्रकृति का था। यही वजह थी की वह भी बचपन से ही धर्म कर्म में विश्वास रखती थी और लड्डू गोपाल की भक्ति में लीन रहती। वह लड़की लगभग हर माह लड्डू गोपाल के दर्शन करने वृन्दावन जाती और वहां लड्डू गोपाल के दर्शन कर वापस अपने घर आ जाती।

धीरे धिरे समय बीतता गया और वह बड़ी हो गयी पर उसने कभी भी वृन्दावन जाना नहीं छोड़ा। कुछ देने बाद उस लड़की की शादी हो गयी फिर भी वह अपने ससुराल से हर माह लड्डू गोपाल के दर्शन करने वृन्दावन जाना नहीं भूलती। कुछ साल और बिता और उसे बच्चे भी हो गए।

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धीरे-धीरे बच्चे भी बड़े हो गए और उनकी भी शादी हो गयी लेकिन उस लड़की ने वृंदावन जाना नहीं छोड़ा। कुछ सालों बाद वह लड़की जब वृद्ध हो गयी और उसे चलने फिरने में परेशानी होने लगी तो उसने वृन्दावन जाकर लड्डू गोपाल की एक मूर्ति ले आई और घर में ही उसकी पूजा करने लगी।

एक दिन की बात है पूजा करने के बाद वह अपनी बहु से से कहा की बहु जरा मेरे लड्डू गोपाल की मूर्ति को कमरे में रख दे। बहु ने सास की हाथ से मूर्ति ली  और कमरे में जाकर रखने लगी की तभी अचानक गलती से मूर्ति बहु के हाथ से छूट गयी।मूर्ति के गिरते ही बड़े ही जोर की आवाज आई जिसे सुन बूढी माँ घबरा गई और जोर से चिल्लाने लगी -क्या हुआ बहु ? क्या मेरे लड्डू गोपाल निचे गिर गए ?

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यह सुन बहु बोली -जी माँ जी लड्डू गोपाल की मूर्ति गलती से मेरे हाथों से गिर गई। यह सुनकर बूढी माँ और जोर जोर से चिल्लाने लगी और रो-रो कर कहने लगी कोई जाओ और डॉक्टर को जाकर बुला लाओ।  मेरे लड्डू गोपाल को चोट लग गयी है। 

अपनी सास के मुंह से ऐसी बातें सुनकर बहु ने पहले सोचा की वो नाटक कर रही है पर जब काफी देर तक उसकी सास इसी तरह चिल्लाती रही तो उसे लगा की शायद बुढ़िया पागल हो गयी है। फिर शाम को जब उसे बुढ़िया का बेटा घर आया तो बहु ने उसे सब कुछ बताया। अपने  पत्नी की बातें सुनकर बेटा को भी लगा की कहीं अधिक उम्र हो जाने की वजह से माँ पागल ना हो गई हो। फिर उसे अपने बच्चों का ख्याल आया और उसने अपनी माँ को पागल कहने भेजने का निश्चय किया।

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पर कहते हैं ना की भगवान अपने भक्त की हमेशा मदद करते हैं और यहाँ भी यही हुआ। उस बुढ़िया के पड़ोस में एक बड़ा ही नेक और समझदार आदमी रहता था। उसने उस बुढ़िया के बेटे को अपने पास बुलाया और उसे समझते हुए कहा -देखो बेटे बचपन और बुढ़ापा एक जैसे होते हैं। इसलिए तुम एक काम करो जाकर एक डॉक्टर को बुला लाओ। उस डॉक्टर को पहले ही समझा देना की उसे एक  मूर्ति की जांच करनी है। यह सुन उस बुढ़िया का बेटा बोला लेकिन चाचा एक मूर्ति की जांच करने कौन सा डॉक्टर आएगा। तब उस आदमी ने कहा बेटे डॉक्टर को जब पैसे मिलेंगे तो वह अवश्य ही आएगा। इस तरह तुम्हारी माँ को पागलखाने भी नहीं जाना पड़ेगा और उसकी जिद भी पूरी हो जाएगी।

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उस आदमी के समझने पर बुढ़िया का बेटा समझ गया और एक डॉक्टर के पास गया। डॉक्टर को उसने सारी बातें बतलायी। पहले तो डॉक्टर को लगा की यह कौन सा पागल उसके पास आ गया है। फिर बुढ़िया के बेटे ने डॉक्टर से कहा डॉक्टर साहब आपको कुछ नहीं करना है बस मेरे घर जाकर मूर्ति के जांच के बाद बस इतना कहना है की इस मूर्ति में अब कुछ भी नहीं बचा है ताकि मेरे माँ को तसल्ली मिल जाये। इसके बदले आपकी जो भी फीस होगी वो मैं दे दूंगा। यह सुन डॉक्टर राजी हो गया।

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अगले दिन सुबह सुबह वह डॉक्टर बुढ़िया के घर आया और आते ही बोला बूढी माँ  कहाँ है तेरा लड्डू गोपाल। बुढ़िया ने मूर्ति को दिखाते हुए कहा आओ डॉक्टर साहब आओ जरा देखना क्या हो गया है मेरे लड्डू गोपाल को। डॉक्टर दूर से ही बोला बूढी माँ  इसमें तो जान ही नहीं है,ये तो ख़त्म हो गयी है। यह सुन बुढ़िया को गुस्सा आ गया,बुढ़िया ने डॉक्टर से पुछा डॉक्टर तुझे कितने साल हो गए डॉक्टरी करते हुए। डॉक्टर घबरा गया और बोला चालीस साल,पर क्यों ?

बुढ़िया ने कहा चालीस साल हो गए डॉक्टरी करते हुए पर अभी तक ये समझ नहीं आया की मरीज को हाथ लगाए बिना उसकी बीमारी का पता नहीं चलता। यह सुन डॉक्टर को लगा की शायद वो ज्यादा ही जल्दी वह अपना काम ख़त्म कर रहा है। उसने जाकर मूर्ति की हाथ की नब्ज देखि और कहा की ,माँ कुछ नहीं है तेरे लड्डू गोपाल में। बुढ़िया बोली डॉक्टर सही से देख ऐसा नहीं हो सकता। डॉक्टर ने इस बार मूर्ति के साइन पर हाथ लगाया  और फिर बोला माँ अब कुछ नहीं है तेरी इस मूर्ति में,यह ख़त्म हो गयी।

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फिर भी उस बुढ़िया को विश्वास नहीं हुआ ,उसने डॉक्टर से कहा बेटा तुम लोगों के पास जो मशीन होती है ना जरा उससे चेक करके तो देख। डॉक्टर समझ गया की बूढी माँ स्टेथोस्कोप  की बात कर रही है। यह सुन उस डॉक्टर ने अपना स्टेथोस्कोप  निकाला और उसे मूर्ति की छाती पर लगाया। मूर्ति में से जोर जोर से धक्-धक् की आवाज आई। यह सुन डॉक्टर हैरान हो गया उसे अपने कानो पर विश्वास ही नहीं हो रहा था । उसने बार-बार चेक करा और हर बार धक्-धक् की आवाज आई।

उसके बाद उस डॉक्टर ने उस बुढ़िया के पैर पकड़ लिए और बोला माँ यह दुनिया जो तुझे पागल कहती है ना असल में यह दुनिया ही  पागल है। जो इस मूर्ति के पीछे छिपे तेरी भावना को नहीं देख सकी। इस मूर्ति में जान नहीं थी यह तो तेरी श्रद्धा और भक्ति थी की इस मूर्ति में भी जान आ गयी।