क्या रामायण के बाद हनुमान चीन चले गए थे

रामायण में हनुमान जी ना होते तो शायद रामायण की कहानी कुछ और ही होती। रामभक्त हनुमान रामायण के सबसे महत्वपूर्ण पात्रों में से एक थे। हनुमान जी की कई गाथाएं हमारे धर्मग्रंथों में पढ़ने को मिल जाती है ,किन्तु इसका विवरण कहीं भी नहीं मिलता की प्रभु श्री राम के वैकुण्ठधाम वापस जाने  के बाद पवनपुत्र हनुमान कहाँ गए ? लेकिन इस लेख में हम अआप्को प्रयास करेंगे की रामायण के बाद हनुमान जी वास्तव में कहाँ गए थे।

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कई कथाओं में ऐसे किस्से पढ़ने को मिलते हैं जो इशारा करते हैं की हनुमान जी रामायण के बाद चीन चले गए थे। ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्यूंकि चीन की दंत कथाओं में एक ऐसे दिव्य वानर का जिक्र मिलता है जो एक देवी के अंश से पैदा हुआ था। उसके पिता कोई नहीं थे और उसमें हनुमान जी जैसी ही अद्भुत शक्तियां थीं। इस दिव्य वानर को चीन के लोग भी हनुमान जी की तरह ही आज भी पूजते हैं। चीन के लोग इस दिव्य वानर को मंकी किंग के नाम से पूजते है। हनुमान जी की तरह ही मंकी किंग की शक्ल बिल्कुल वानर जैसी थी लेकिन वो दो पैरों पर चल सकता था। हनुमान जी की तरह ही उसकी अपार शक्ति का सामना करना किसी देव या दानव के वश में नहीं था। युद्धकला में उसका कोई मुकाबला ही नहीं था।

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हनुमान जी तरह ही मंकी किंग भी हवा में बिना किसी मदद के उड़ सकता था। मंकी किंग के बारे में चीनी ग्रंथों में साफ लिखा है कि उनकी एक और अद्भुत शक्ति ये थी कि वो किसी का भी रूप धारण कर सकते थे। हनुमान जी की रूप बदलने वाली शक्ति का जिक्र रामायण में तो बार-बार आता है। हिंदू धर्मग्रंथों में हनुमान जी के बचपन के बारे में जो किस्से दर्ज हैं वो बताते हैं कि हनुमान जी बचपन में बेहद शरारती थे। ऐसा ही चीन के धर्मग्रंथों में मंकी किंग के बारे में लिखा है। बकायदा मंकी किंग की शरारतों का चीनी दंतकथाओं में विस्तार से वर्णन है। मंकी किंग और हनुमान जी के हथियारों मे भी समानता देखने को मिलती है। चीनी धर्मग्रंथों के मुताबिक मंकी किंग एक ही हथियार से लड़ते थे और वो धातु की बनी एक लाठी जैसा था। वो धारदार हथियार का इस्तेमाल नहीं करते थे।

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हनुमान जी के द्वारा भी कभी किसी धारदार हथियार के इस्तेमाल का जिक्र रामायण में नहीं है। वो सिर्फ गदा से युद्ध करते थे।  एक जिक्र तो ये भी है कि मंकी किंग ने बाकायदा स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया था। इधर देवराज इंद्र से हनुमान के विवाद का वर्णन हमे पुराने में  भी पढ़ने को मिलता है। इस कहानी के मुताबिक इंद्र के वज्र प्रहार से हनुमान अचेत हो गए थे। इसके बाद देवताओं ने हनुमान से माफी मांगते हुए उनको अलग-अलग वरदान दिए थे। हिंदू संस्कृति और चीनी संस्कृति की इन कथाओं में भी बेहद समानता है। दोनों से कम से कम इतना तो साफ हो ही जाता है कि मंकी किंग और हनुमान दोनों का स्वर्ग से विवाद हुआ था।  तो क्या ये मुमकिन नहीं कि ये दोनों असल में एक ही थे।

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इसके अलावे मंकी किंग भी हनुमान जी की तरह ही बालब्रह्मचारी थे। दोनों को ही दिव्य शिक्षा मिली थी। शस्त्र और शास्त्र ज्ञान में दोनों को ही निपुण माना गया है। इन सारी समानताओं को देखने से तो यही प्रतीत होता है की भारत में हनुमान और चीन में मंकी किंग के नाम से प्रचलित यह महायोद्धा एक ही हैं।

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