महाभारत एवं पुराणों में असुरों की उत्पत्ति एवं वंशावली के वर्णन में कहा गया है की ब्रह्मा के छः मानस पुत्रों में से एक ‘मरीचि’ थे जिन्होंने अपनी इच्छा से कश्यप नामक प्रजापति पुत्र उत्पन्न किया। कश्यप ने दक्ष प्रजापति की 17 पुत्रियों से विवाह किया।

उनमें से एक का नाम कद्रू था जिनसे 1000 बलशाली नाग (सर्प नहीं) पैदा हुए जिसमें सबसे बड़े भगवान् शेषनाग थे। कद्रू के बेटों में सबसे पराक्रमी शेषनाग थे। धार्मिक ग्रन्थ तो ये भी कहते हैं की पूरी पृथ्वी शेषनाग के फन पर ही टिकी है। क्या है इसके पीछे की सच्चाई आइये मिलकर जानते हैं।

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शेषनाग के हजार सर हैं। उनके पास एक खास क़िस्म की मणि है ।अनंत क्षमताओं के बाद भी शेषनाग सहज और सेवक स्वभाव के थे। बात उस समय की है जब किसी बात से नाराज होकर शेषनाग ने अपनी मां और भाइयों का साथ छोड़कर गंधमादन पर्वत पर तपस्या करनी आरंभ की। शेषनाग ने कड़ी तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा ने उन्हें वरदान दिया कि तुम्हारी बुद्धि कभी धर्म से विचलित नहीं होगी।

ब्रह्मा ने शेषनाग को यह भी कहा कि यह पृथ्वी निरंतर हिलती-डुलती रहती है, अत: तुम इसे अपने फन पर इस प्रकार धारण करो कि यह स्थिर हो जाए। इस प्रकार शेषनाग ने संपूर्ण पृथ्वी को अपने फन पर धारण कर लिया।

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जैसा की विज्ञानं ने साबित किया है की पृथ्वी सूर्य से निकली है और अपने एक्सिस  पे घूमने के कारण एक संतरे की तरह गोल है। इस तस्वीर को गौर से 

तो अब लगता है की हाँ ये हो सकता है शेषनाग हैं पर वो बाहर नहीं बल्कि अंदर से पृथ्वी को सहारा दे रहें है।

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