HOW LORD RAM DIED

आज के इस पोस्ट में हम जनेंगे की प्रभु श्री राम की मृत्यु कैसे हुई? इस भौतिक जगत में जो आता है वो पहले ही अपनी मृत्यु का समय निश्चित करवा के आता है। जो यहाँ सांसारिक सुख भोगने के लिए जन्मा है वह वापस अवश्य जायेगा। परन्तु मृत्यु की बात भगवान पर लागू नहीं होती। भगवान अदृश्य या अंतर्लीन होते हैं,उनकी मृत्यु नहीं होती। तो आइये जानते हैं की प्रभु श्री राम कैसे इस भौतिक जगत से अदृश्य हुए थे ?

प्रभु राम की कथा

भगवान विष्णु के अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम कहे जाने वाले राम धर्म का सन्देश देने के लिए अवतरित हुए थे। महर्षि बाल्मीकि ने प्रभु श्री राम से सम्बंधित अनेक कथाएं लिखी है। जिनके द्वारा कलयुग में भगवान को जानने का अवसर मिलता है। प्रभु श्री राम ने पृथ्वी पर दस हजार वर्षों तक शासन किया। अपने पूरे जीवन कल में प्रभु श्री राम अनगिनत महान कार्य किये। जिनके द्वारा उन्होंने लोगों को एक आदर्श जीवन जीने का सन्देश दिया। प्रभु श्री राम के राज्य में प्रजा अत्यधिक प्रसन्न एवं संतुष्ट थी। वह माता-पिता दशरथ और कौशल्या के आदर्श पुत्र तथा धर्मपत्नी सीता के लिए आदर्श पति थे। तो आखिर क्या कारण था की भगवान को सब कुछ त्यागकर लोप होना पड़ा।

कालदेव का आगमन

पदम् पुराण में उल्लेखनीय एक कथा के अनुसार एक दिन भगवान राम के दरबार में एक वृद्ध संत का आगमन हुआ। जो भगवान से कुछ व्यक्तिगत रूप से अकेले में बात करना चाहते थे। राम ने उस संत का निवेदन स्वीकार किया तथा एक कक्ष में चर्चा करने के लिए गए। उस कक्ष के द्वार पर अपने सहोदर लक्षमण को खड़ा किया। और कहा की चर्चा में व्यघ्न डालने वाले को मृत्यु दंड प्राप्त होगा। लक्षमण ने बड़े भाई की आज्ञा का पालन किया। उल्लेखनीय है की वह वृद्ध संत कालदेव थे। जिन्हे विष्णु लोक यह बताने के लिए भेजा गया था की धरतीलोक पर उनकी समय अवधि समाप्त हो चूकि है। और उन्हें अब वैकुण्ठ धाम वापस लौटना होगा।

ऋषि दुर्वाशा का क्रोध

जब चर्चा चल रही थी उसी समय ऋषि दुर्वाशा का आगमन हुआ। उन्होंने लक्षमण से अंदर जाने को कहा,परन्तु भगवान की आज्ञा का पालन करते हुए लक्षमण ने उन्हें प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी। यह सुन ऋषि दुर्वाशा क्रोधित हो गए और लक्षमण को चेतावनी देते हुए कहा की यदि उन्हें अंदर नहीं जाने दिया तो वह राम को श्राप दे देंगे। यह सुन लक्षमण चिंतित हो गए की भाई की आज्ञा का पालन करें या उन्हें श्राप बचाये।

कैसे हुई थी प्रभु राम के भाइयों की मृत्यु

लक्षमण की मृत्यु  

संकट  में पड़े लक्षमण ने सोचा यदि वह स्वंय अंदर चले गए तो मृत्युदंड भुगतना पड़ेगा। और राम श्राप से बच जायेंगे,उन्होंने ऐसा ही किया। पर अपने भाई को चर्चा में बाधा डालते देख भगवान राम धर्म संकट में पड़ गए। फिर राम ने लक्षमण को राज्य तथा देश छोड़कर जाने को कहा जो उस समय मृत्युदंड के समान ही माना जाता था। लेकिन लक्षमण के लिए अपने भाई से दूर रहना संभव नहीं था। तो उन्होंने स्वंय ही ओस संसार को छोड़ने का निर्णय ले लिया। वे सरयू नदी में समां गए और नदी के अंदर अनंत शेष का अवतार लिया। और विष्णु लोक की ओर प्रस्थान कर गए।

श्री राम का देहत्याग

भातृ प्रेम में डूबे भगवान राम को लक्षमण के बिना एक क्षण भी व्यतीत करना अच्छा ना लगा। तब श्री राम ने शासन छोड़कर इस लोक से चले जाने का निर्णय लिया। और सरयू नदी की ओर चले गए। श्री राम सरयू नदी के तल तक जाकर अदृश्य हो गए और कुछ देर बाद भगवान विष्णु प्रकट हुए। इस प्रकार भगवान राम लोप हो गए।

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