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महाभारत की रोचक कथाओं को जानने के लिए तो हम हमेशा उत्सुक रहते हैं। इस महाकव्य की सबसे प्रमुख पात्रों में से एक अर्जुन के बारे में अनगिनत कथाएं हैं। तो आइये इस पोस्ट में जानते हैं अर्जुन की पत्नियों और उनसे उत्पन्न पुत्रों के बारे में।

अर्जुनउलूपी विवाह

क्या आप जानते हैं की अर्जुन की चार पत्नियां तथा चार पुत्र थे। जी हाँ द्रौपदी के अतिरिक्त अर्जुनने तीन और विवाह किये थे। द्रौपदी से उत्पन्न पुत्र का नाम था सत्कर्मा। अर्जुन ने दूसरा विवाह एक नाग कन्या से किया था जिसका नाम था उलूपी। कहा जाता है की अपने बारह वर्ष के वनवास के दौरान अर्जुन गंगा स्नान के लिए हरिद्वार गए। स्नान के समय उलूपी नाम की नागकन्या अर्जुन उन पर मोहित हो गयी। और वह उनको खींचकर नागलोक ले गयी थी। फिर उसने नागलोक में ही उनसे विवाह किया। और इन दोनों से जो पुत्र उत्पन्न हुआ उसका नाम था इरावन

चित्रांगदा से विवाह

इसी तीर्थ यात्रा के दौरान जब अर्जुन मणिपुर पहुंचे तो वहां के राजा चित्रवाहन की पुत्री चित्रांगदा से अर्जुन को प्रेम हो गया था। और तब उन्होंने राजा के पास जाकर चित्रांगदा से विवाह करने का प्रस्ताव रखा। राजा विवाह के लिए सहमत हो गए। अर्जुन और चित्रांगदा से बभ्रुवाहन नामका पुत्र उत्पन्न हुआ था। इस दम्पति ने बभ्रुवाहन को राजा चित्रवाहन को दे दिया था ताकि उनका वंश चलता रहे।

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सुभद्रा से विवाह

इसके पश्चात् इसी वनवास के दौरान अर्जुन द्वारका पहुंचे। जहाँ उनकी मुलाकात भगवान कृष्ण की बहन सुभद्रा से हुई और वो सुभद्रा पर मोहित हो गए थे। इन दोनों से उत्पन्न पुत्र अभिमन्यु को कौन नहीं जानता। महाभारत का अत्यंत बुद्धिमान और वीर पात्र अभिमन्यु ने गर्भ में ही चक्रव्यूह तोड़ना सिख लिया था। अभिमन्यु चंद्रदेव के अवतार थे। जिसका विवाह मतस्य राज्य की राजकुमारी उत्तरा से हुआ था। और इस प्रकार अभिमन्यु और उत्तरा से परीक्षित नाम का पुत्र उत्पन्न हुआ। जो बाद में राजा परीक्षित के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसी प्रकार की महाभारत की अनेकों कथाएं हैं जो हम आपके लिए लाते रहेंगे।

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