महाभारत कुरुक्षेत्र : आप सब महाभारत के बारे में तो जानते ही होंगे कैसे महाभारत के युद्ध में धर्म की विजय और अधर्म का नाश हुआ | महाभारत का 18 दिन चलनेवाला विशाल युद्ध कुरुक्षेत्र के मैदान में लड़ा गया | इस बात के फैसला के लिए सबसे अहम् व्यक्ति भगवान् कृष्ण द्वारा लिया गया था मगर यह बात सभी के मन में आती है की महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र के मैदान में ही क्यों लड़ा गया? श्री कृष्ण ने यह फैसला क्यूँ लिया? इस सब के बारे में एक कथा प्रचलित है जिसका वर्णन महाभारत में भी मिलता है तो आइये जानते है श्री कृष्ण ने क्यों लिया यह फैसला की महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र के मैदान में ही लड़ा जायेया?

श्रीकृष्ण के मन में युद्ध स्थान से जुड़ा संदेह

कौरवो से परेशान होकर पांड्वो ने युद्ध करने का निश्चय किया, कौरवो और पांड्वो के बीच में जब यह निश्चित हो गया की अब महाभारत का युद्ध होगा तो युद्ध के लिए जगह तलाश करने की जिम्मेदारी श्रीकृष्ण को दी गई | भगवान् श्री कृष्ण इस युद्ध के द्वारा मनुष्य जाती में फैली हुई असुरता को समाप्त करना चाहते थे | मगर श्रीकृष्ण के मन में यह संदेह था की यह युद्ध सगे संबंधियों, भाई-भाई, गुरु-शिष्य आदि के बीच लड़ा जाएगा जिससे अपने सगे सम्बन्धियों और भाइयों को मरते देख युद्ध कर रहे योद्धा युद्ध को विराम न दे दें | इसीलिए श्रीकृष्ण ऐसी जगह पर युद्ध करवाना चाहते थे जंहा क्रोध और द्वेष की भावना फैली हुई हो |

युद्ध स्थान से जुडी प्रचलित कथा

इसी उद्देश्य के कारण श्रीकृष्ण ने अपने कई दूतों को सभी दिशाओं में भेजा जिससे वो वंहा घटित होनेवाली घटनाओं का वर्णन विस्तार से सुना सकें | कुछ समय बाद एक जगह पर घटित होनेवाली घटना श्री कृष्ण को बताई उसने कहा की एक स्थान पर बड़े भाई ने छोटे भाई से खेत में भरे बरसात के पानी को मेड बनाकर रोकने के लिए कहा | मगर छोटे भाई ने इस काम को करने से मना कर दिया और बड़े भाई से लड़ते हुए जवाब दिया कि,” क्या में तुम्हारा गुलाम या दास हूँ तुम खुद क्यों नहीं इस पानी को बहने से रोक देते हो |”छोटे भाई की इस तरह की बातो से लज्जित महसूस करते हुए क्रोधित होकर बड़े भाई ने अपनी कटार निकालकर के छोटे भाई को मार डाला और उसकी लाश को घसीटते हुए उसी जगह डाल दिया जंहा से पानी बह रहा था और लाश को पानी रोकने के लिए रहने दिया |

श्रीकृष्ण ने इस वजह से किया कुरुक्षेत्र का चयन : महाभारत कुरुक्षेत्र

भाई के लिए भाई के मन में इस तरह की भावना और नृशंसता का वर्णन विस्तार से सुनकर श्री कृष्ण ने महाभारत के युद्ध के लिए इसी जगह को सबसे सही माना और इसी जगह पर महाभारत का विशाल युद्ध करवाने का निर्णय किया | श्रीकृष्ण के अनुसार जब कौरव और पांडव अपने सगे संबंधियों और गुरु आदि के साथ यहाँ पर पहुचेगे तो उनके मन में से एक दुसरे के प्रति सम्मान, प्रेम, दया भावना आदि का अंत हो जाएगा और युद्ध के बीच विराम या संधि जैसी कोई भी संभावना नहीं बचेगी | वह स्थान कोई और नहीं बल्कि कुरुक्षेत्र ही था जंहा सम्मान, प्रेम, दया जैसी भावना किसी के भी अंदर नहीं थी |

श्रीकृष्ण के निर्णय से मिलनेवाली सीख : महाभारत कुरुक्षेत्र

इस प्रकार महाभारत के युद्ध से जुडी प्रचलित और महाभारत में वर्णित यह कथा सिद्ध करती है की जिस स्थान निवास करनेवाले लोगो में जैसी भावना और संस्कार होते है उसका प्रभाव उस जगह की जमीन पर भी पड़ता है | कहा जाता है की भूमि में अच्छी बुरी भावनाए और संस्कार बहुत अधिक समय पर निहित रहते है | इसीलिए कहा जाता है की उसी स्थान पर निवास करना चाहिए जंहा पर अच्छे विचार, भावनाएं और शुभ कार्यो का समावेश होता है |

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