पूरे देश में वैसे तो कई भगवान महादेव का मंदिर है।लेकिन मुंबई से करीब 200 मील दूर औरंगाबाद में भगवान शिव का एक ऐसा मंदिर है। जिसका रहस्य वैज्ञानिको के लिए आज भी एक अबूझ पहेली बना हुआ है। इस मंदिर की ऊंचाई 100 फिट है जो की एथेंस की एक ईमारत पार्थेनन से दोगुनी है। ये मंदिर खुद में बहुत से ऐसे रहस्य समेटे हुए है। जिसे जानने के बाद हर शिव भक्त गर्व महसूस करेगा। तो आइये जानते है इस कैलाश महादेव मंदिर का रहस्य।

कैलाश महादेव मंदिर

महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के एलोरा गुफाओं में एक रहस्य्मयी शिव मंदिर बना हुआ है। जिसे कैलाश महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है ।ऐसा माना जाता है की इस मंदिर का निर्माण कृष्णा प्रथम ने करवाया था। मंदिर के अंदर एक विशाल आकार का शिवलिंग भी मौजूद है। इस मंदिर को करीब 7000 मजदूरों ने 150 वर्ष में बनाया था। शिव के इस मंदिर की सबसे खास बात यह है की इस मंदिर में पूजा नहीं की जाती। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है की इसे स्वर्ग में निर्मित कर धरती पर स्थापित किया गया ।  

मंदिर का इतिहास

इस बात का प्रमाण इस मंदिर की नक्काशी और भव्य प्रतिमाएं दर्शाती है। जिसका निर्माण करना किसी साधारण इंसान के वश की बात नहीं है। इस मंदिर को और इसमें लगी प्रतिमाओं को पहाड़ को तराशकर बनाया गया है।  इस मंदिर के निर्माण में चट्टान को छोड़कर किसी भी दूसरी भवन निर्माण सामग्री का  इस्तेमाल नहीं किया गया है। जिस कारण वैज्ञानिक इस मंदिर के सही सही उम्र का अभी तक पता नहीं लगा सके हैं। क्यूंकि अगर कार्बन डेटिंग पद्धति से भी सिर्फ चट्टान के उम्र का पता लगाया जा सकता है ना की पूरे मंदिर का। यही कारण है कुछ वैज्ञानिक इस मंदिर की आयु 1900 साल बताते है तो कुछ इस मंदिर को 6000 साल से भी पुराना मानते हैं। पर सभी इस बात से हैरान हैं की आखिर इतने साल पहले एक चट्टान को काटकर ,इस मंदिर का निर्माण कैसे किया गया होगा।

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मंदिर का निर्माण

इस मंदिर की सबसे खास बात यह है की इस मंदिर का निर्माण निचे से ऊपर की ओर नहीं बल्कि ऊपर से निचे की ओर किया गया है। यह रहस्य सदियों से विज्ञानं और वैज्ञानिकों के लिए एक चुनौती बनी हुई है।  भारत ही नहीं बल्कि कई देश के वैज्ञानिक इस मंदिर के निर्माण कला को देखकर हैरान हो जाते हैं।उन्हें इस बात की सबसे ज्यादा हैरानी होती है की बिना किसी जुड़ाव के यह शिव मंदिर हजारों वर्षों से कैसे खड़ा है।

बोमास्त्र पद्धति

अगर आप ये सोच रहे होंगे की इस मंदिर का निर्माण कोई चमत्कार से हुआ होगा तो आप गलत है। क्योंकी हमारे वेद शास्त्रों में एक ऐसी पद्धति का उल्लेख मिलता है जिससे इस तरह का निर्माण करना संभव है और वो है बोमास्त्र। इस अस्त्र में पत्थरों को पिघलाने की शक्ति थी। इसलिए ऐसा माना जाता है की इस मंदिर के निर्माण में उस समय के कारीगरों ने बोमास्त्र का सहारा लिया होगा। मदिर को देखकर ऐसा भी लगता की बोमास्त्र को उपयोग में लाने से पहले ही इस पूरे मंदिर का नक्शा कारीगरों ने तैयार कर लिया होगा।

मंदिर के अंदर का रहस्य

मंदिर के अंदर बहुत से ऐसे विशाल खम्भे है जिनको जोड़ते हुए पुल भी बनाये गए हैं। मंदिर में एक बालकोनी भी बनी हुई है। मंदिर के नीचे सुरंगों का ऐसा मायाजाल है जहाँ कुछ ही लोग पहुँच पाए हैं। एक विदेशी रिसर्चर ने मंदिर के नीचे बनी सुरंगों के अंतिम छोर तक जाने का दावा किया है। उसने बताया की नीचे एक विशाल कमरा है , जो देखने में  एक मंदिर की तरह है.साथ ही उसने वहां 7 लोगों को देखने का दवा भी किया और बताया की उन सात लोगों में से  2 लोग कभी दिखते और कभी गायब हो जाते। कुछ लोग यह भी मानते हैं की मंदिर के नीचे पूरा का पूरा शहर हुआ करता था। मौजूदा समय में ये गुफाएं आम लोगों के लिए बंद कर दी गयी है।

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