जैसा कि समय समय पर हम महाभारत और रामायण के पात्रों के जुडी रोचक कथाएं बताते रहते हैं। इस पोस्ट में हम आपको बताएँगे कर्ण के पुत्रों के विषय में। साथ ही हम जानेंगे किसने किया था कर्ण के आठ पुत्रों का वध ?

कर्ण का जीवन

कर्ण एक महान योद्धा और बलशाली योद्धा था फिर भी वह पूरे जीवन अपमान का पात्र बना  रहा। क्यूंकि उसका पालन पोषण एक शूद्र माता-पिता द्वारा  किया गया था। इसी कारण वह द्रौपदी से प्रेम करने के बावजूद भी उससे विवाह नहीं कर पाया था।  और सूत पुत्र होने के कारण उसे अधिक महत्त्व नहीं दिया गया। द्रौपदी का विवाह पांडवों से होने के बाद उसने पिता अधिरथ  के कहने पर एक सूत कन्या से विवाह किया जिसका नाम रुषाली था। बाद में कर्ण ने सुप्रिया नाम की कन्या से भी विवाह किया। इस प्रकार कर्ण की दो पत्नियां थीं जिनसे 9 पुत्र प्राप्त हुए।

कारण के जीवन से जुडी ख़ास बातें

 9 पुत्रों के नाम

वृशसेन, वृशकेतु, चित्रसेन, सत्यसेन, सुशेन, शत्रुंजय, द्विपात, प्रसेन और बनसेन।इन सभी में पिता के सामान पराक्रम तो नहीं था परन्तु ये बहुत साहसी और बलशाली थे। ये सभी पुत्र किसी भी योद्धा के सारथी नहीं बने अपितु अपने पिता की ओर से योद्धाओं की तरह महाभारत का युद्ध लड़े। महाभारत के महान योद्धा पितामह भीष्म, गुरु द्रोणाचार्य, भीम, कर्ण, अर्जुन के सामने कर्ण के 9 पुत्रों का बल कुछ भी नहीं था। फिर भी उसके इन पुत्रों ने साहस दिखाते हुए अपने पिता की ओर से युद्ध करने का निश्चय किया। और इनमे से आठ पुत्र मारे गए।

कर्ण के पुत्रों का वध

बनसेन ने युद्ध में सबसे बलशाली पांडव भीम से युद्ध किया और भीम के द्वारा ही बनसेन वीरगति को प्राप्त हुए। वृशसेन, शत्रुंजय और द्विपात ने महान धनुर्धर अर्जुन के साथ युद्ध किया। अर्जुन को कौन हानि पहुंचा सकता था जब स्वयं भगवान कृष्ण उनके सारथी बने थे। इस प्रकार इन 3 पुत्रों की मृत्यु अर्जुन के हाथों हुई। कर्ण के अन्य तीन पुत्रों चित्रसेन, सत्यसेन और सुशेन ने नकुल के साथ युद्ध किया और ये तीन नकुल के द्वारा वीरगति को प्राप्त हुए। जबकि उसके पुत्र प्रसेन का युद्ध सात्यिकी के साथ हुआ था। सात्यिकी अर्जुन का शिष्य था और एक महान धनुर्धर था। प्रसेन का वध सात्यिकी द्वारा हुआ. और इस प्रकार कर्ण के आठ पुत्र कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में वीरगति को प्राप्त हुए। परन्तु उसके पुत्र वृषकेतु का वध कोई नहीं कर सका और युद्ध के पश्चात कर्ण के सभी पुत्रों में एक वृषकेतु ही जीवित था।

कर्ण पुत्र बना हस्तिनापुर नरेश

ऐसा कहा जाता है कि युद्ध के पश्चात पांडवों को यह पता चला कि कर्ण उन्ही का भाई था। तब अर्जुन ने अपने भतीजे अर्थात कर्ण के जीवित बचे हुए पुत्र वृषकेतु को इंद्रप्रस्थ का राजा घोषित कर दिया.

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