Lord Krishna

मित्रों ये घोर कलयुग का समय है। इस विपरीत काल में हरिभजन ही एक मात्र जरिया है मोक्ष पाने का। जो हरी नाम लेगा हरी उसे बचाने कलयुग में भी स्वंय प्रकट होंगे। इसी कड़ी में हम लेकर आये हैं कलयुग की कुछ ऐसी घटनाएं जिन्होंने धर्म में हिन्दुओं की आस्था को और प्रबल किया।

पुराणों में भक्त और ईश्वर के अटूट प्रेम से संबंधित बहुत सी कथाओं का  उल्लेख मिलता है। कलयुग की कथा की इस सीरीज में आज हम लेकर आये हैं एक ऐसे  ही भक्त की कहानी जिसे देखने के बाद आपको भक्त और भगवान का रिश्ता कितना अटूट होता है उसका पता चल जाएगा।

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यह कथा हमारे देश की साक्षी गोपाल नामक एक मंदिर से जुडी हुई है। कथा के अनुसार एक बार दो ब्राह्मण वृंदावन की यात्रा पर निकले। उनमे से एक वृद्ध था और दूसरा जवान था। मार्ग लम्बा और कठिन था जिस वजह से उन दोनों यात्रियों को यात्रा के दौरान कई कष्टों का सामना करना पड़ा। उस समय आज के जैसे रेलगाड़ियों और बसों की भी सुविधा उपलब्ध नहीं थी। यात्रा के दौरान युवा ब्राह्मण ने वृद्ध व्यक्ति की खूब मदद की। जिस वजह से वृंदावन पहुंचकर उस वृद्ध ब्राह्मण ने कृतज्ञता जताते हुए कहा हे युवक ! तुमने मेरी खूब सेवा की है, मैं तुम्हारा अत्यंत कृतज्ञ हूं। इस सेवा के बदले मैं तुम्हे पुरूस्कार देना चाहता हूँ।पर उस युवा ब्रह्मण ने पुरूस्कार लेने से मना कर दिया।जिसके बाद भी वृद्ध व्यक्ति हठ करने लगा। फिर उस वृद्ध व्यक्ति ने अपनी जवान पुत्री का विवाह उस ब्राह्मण युवक से करने का वचन दिया।  

भगवान श्री कृष्ण के पांच अनमोल वचन

ब्राह्मण युवक ने वृद्ध व्यक्ति को समझाया कि ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि आप बहुत अमीर हैं और मैं तो बहुत ही गरीब ब्राह्मण हूं। फिर भी वृद्ध व्यक्ति अपनी हठ पर अड़ा रहा और फिर कुछ दिन तक वृंदावन रहने के बाद दोनों घर लौट आएं। वृद्ध व्यक्ति ने सारी बातें घर पर आकर बताई कि उसने अपनी बेटी का विवाह एक ब्राह्मण से तय कर दिया है। पर पत्नी को यह सब मजूंर नहीं था। उस वृद्ध पुरुष की पत्नी ने कहा,” यदि आप मेरी पुत्री का विवाह उस युवक से करेंगे तो मैं आत्महत्या कर लूंगी। कुछ समय व्यतीत होने के बाद ब्राह्मण युवक को चिंता होने लगी की वृद्ध अपने वचन को पूरा करेगा या नहीं। फिर ब्राह्मण युवक से रहा न गया और उसने वृद्ध ब्राह्मण के पास जाकर उसको उसका वचन याद करवाया। वह वृद्ध पुरुष मौन रहा और उसे डर था कि अगर वह अपनी बेटी का विवाह इससे करवाता है तो उसकी पत्नी अपनी जान दे देगी और वृद्ध पुरुष ने कोई उत्तर न दिया। तब ब्राह्मण युवक उसे उसका दिया हुआ वचन याद करवाने लगा।  तभी वृद्ध ब्राह्मण के बेटे ने उस ब्राह्मण युवक को ये कहकर घर से निकाल दिया कि तुम झूठ बोल रहे हो।  तुम मेरे पिता को लूटने के लिए आए हो।  

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फिर ब्राह्मण युवक  ने कहा कि यह सारे वचन तुम्हारे पिता जी ने श्रीविग्रह के सामने दिए थे। तब वृद्ध व्यक्ति का ज्येष्ठ पुत्र जो भगवान को नहीं मानता था युवक को कहने लगा। अगर तुम कहते हो भगवान इस बात के साक्षी है तो यही सही। यदि भगवान प्रकट होकर यह साक्षी दें कि मेरे पिता ने वचन दिया है तो तुम मेरी बहन के साथ विवाह कर सकते हो। तब युवक ने कहा,” हां , मैं भगवान श्रीकृष्ण से कहूंगा कि वे साक्षी के रूप में आएं। उसे भगवान श्रीकृष्ण पर पूरा विश्वास था कि भगवान श्रीकृष्ण उसके लिए वृदांवन से जरूर आएंगे।  फिर अचानक वृदांवन के मंदिर की मूर्ति से आवाज सुनाई दी कि मैं तुम्हारे साथ कैसे चल सकता हूं मैं तो मात्र एक मूर्ति हूं।

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तब उस युवक ने कहा ,” कि अगर मूर्ति बात कर सकती है तो साथ भी चल सकती है। तब भगवान श्रीकृष्ण ने युवक के समक्ष एक शर्त रख दी कि तुम मुझे किसी भी दिशा  में ले जाना मगर तुम पीछे पलटकर नहीं देखोगे। तुम सिर्फ मेरे नूपुरों की ध्वनि से यह जान सकोगे कि मैं तुम्हारे पीछे आ रहा हूं। “युवक ने उनकी बात मान ली और वह वृंदावन से चल पड़े।

जिस नगर में जाना था वहां पहुंचने के बाद युवक को नूपुरों की ध्वनि आना बंद हो गई।  युवक ने धैर्य न धारण कर सकने के कारण पीछे मुड़ कर देख लिया।  मूर्ति वहीं पर स्थिर खड़ी थी अब मूर्ति आगे नहीं चल सकती थी। क्योंकि युवक ने पीछे मुड़ कर देख लिया था.वह युवक दौड़कर नगर पहुंचा और सब लोगों को इक्ट्ठा करके कहने लगा कि देखो भगवान श्रीकृष्ण साक्षी रूप में आये हैं।  लोग स्तंभित थे कि इतनी बड़ी मूर्ति इतनी दूरी से चल कर आई है। फिर भगवान कृष्ण की मूर्ति ने सबके सामने ब्राह्मण युवक की गवाही दी। उसके बाद वृद्ध ब्राह्मण की पुत्री के साथ उसका विवाह संपन्न हुआ। विवाह के बाद उस युवा ब्राह्मण ने श्रीविग्रह के सम्मान में उस स्थल पर एक मंदिर बनवा दिया और आज भी लोग इस मंदिर में  साश्री गोपाल की पूजा करते है। …

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