शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है ?

शिवरात्रि हिन्दू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन मास की अमावश को मनाई जाती है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं और सारी रात मंदिरों में भगवान शिव का भजन करते हैं। शिवरात्रि औरतों के लिए विशेष रूप से शुभ मानी जाती है। इस उत्सव पर यहाँ विवाहित औरतें अपने पति और पुत्र का सौभाग्य मांगती है। जबकि कुवारी लड़कियां एक अच्छे वर की कामना करती है। तो आइये जानते है की शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है ?

शिवरात्रि की कथा

ऐसा माना जाता है की शिवरात्रि के पावन अवसर पर ही भगवान शिव इस जगत में ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। इस सम्बन्ध में एक पौराणिक कथा भी है। भगवान विष्णु की नाभि से उत्पन्न हुए कमल से ब्रह्मा जी प्रकट हुए। ब्रह्मा जी ने ही सृष्टि की रचना की। भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी में एक बार विवाद हो गया की उन दोनों में श्रेष्ठ कौन है ? उनका ये विवाद जब बढ़ने लगा तभी वहां एक अद्भुत ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ और आकाशवाणी हुई। आप दोनों में से कौन श्रेष्ठ है ये फैसला मैं किये देता हूँ। जो भी पहले मेरे दोनों छोड़ तक पहुँच जायेगा वही इस दुनिया में सर्वश्रेष्ठ कहलायेगा।

भगवान शिव को प्रसन्न करने के मन्त्र

शिव की उत्पति

दोनों उस ज्योतिर्लिंग को समझ नहीं सके और उन्होंने उसके छोड़ का पता लगाने का प्रयास किया। पर दोनों में से कोई भी सफल नहीं हो पाए। जब दोनों देवता निराश हो गए तब ज्योतिर्लिंग ने परिचय देते हुए कहा मैं शिव हूँ। तुम्हारी सृष्टि मैंने ही की है। तब विष्णु तथा ब्रह्मा ने शिव की महत्ता स्वीकार किया। और उसी दिन से शिवलिंग की पूजा की जाने लगी।

शिव-पार्वती का विवाह

एक मान्यता यह भी है की फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को ही शिव-पार्वती का विवाह हुआ था। इसलिए शिवरात्रि का पर्व इसलिए मनाया जाता है। मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी शिवरात्रि कहलाती है लेकिन  फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी महाशिवरात्रि कही गई है।

शिवरात्रि व्रत के फायदे

इस दिन शिव उपासना भक्ति एवं मुक्ति दोनों देती है। क्यूंकि इसी दिन भगवान शिव अर्धरात्रि के समय शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। यह काल वसंत ऋतु के वैभव का समय है। ऋतु परिवर्तन के साथ मन भी उल्लास एवं उमंगों से भरा होता है। यही काल कामदेव के विकास का भी है। लेकिन मनुष्य की कामुक भावना पर नियत्रण प्रभु की आराधना से ही संभव है। भगवान शिव तो स्वंय कामरहित हैं। अतः इसा समय उनकी आराधना ही सर्वश्रेष्ठ है। महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग को दूध,पानी और शहद से नहलाया जाता है। उसके बाद उसपर चन्दन का तिलक लगाकर फल-फूल,पान के पत्ते चढ़ाये जाते हैं। धुप-अगरबती जलाकर ध्यान करने से शिव प्रसन्न होते हैं। 

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