BHEEMKUND

भारत रहस्यों का देश रहा है। यहाँ पौराणिक काल के ऐसे रहस्य हैं जिनका सत्य आज तक वैज्ञानिक खोज रहे हैं। ठीक ही कहा जाता है कि विज्ञान में कारणों, विश्लेषणों और तर्कों के लिए स्थान है। परन्तु अध्यात्म विज्ञान से पूर्णतया परे है। जिसमे ऐसे चमत्कार और रहस्य संभव हैं जिनकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते। आज हम बताने जा रहे हैं भीमकुंड के विषय में जो एक ऐसा रहस्य है जिसका कारण वैज्ञानिकों से लेकर, गोताखोर, खोजकर्ता और डिस्कवरी चैनल तक आज तक कोई नहीं समझ पाया।

भीमकुंड कहाँ है ?

मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के बजना गाँव के निकट स्थित भीमकुण्ड जल का प्राकृतिक स्रोत है। यहाँ का पानी साफ़ और पीने योग्य है। परन्तु आज तक कोई यह नहीं पता लगा पाया कि इस कुंड में पानी कहाँ से आता है।  यहाँ तक कि जब कोई प्राकृतिक आपदा आने वाली होती है तो इस कुंड में पानी का स्तर स्वतः ही बढ़ जाता है। जब पानी का स्तर बढ़ने लगता है तो स्थानीय लोगों को आपदा आने का संकेत मिल जाता है।  इस क्षेत्र में दूर दूर तक पानी का कोई और स्रोत नहीं है। यदि सूखा पड़ जाए तो भी इस कुंड में पानी कम नहीं होता। यहाँ के लोगों का कहना है कि कुंड का पानी कितना भी उपयोग में ले लिया जाए परन्तु इसका स्तर कभी कम नहीं होता। 

भीमकुंड का साफ़ पानी

साधारण तौर पर ठहरा हुआ पानी गन्दा और ख़राब हो जाता है। परन्तु भीमकुण्ड का पानी इतना साफ़ है कि लोग इसे पीने में भी नहीं हिचकिचाते। तो मित्रों पानी को लेकर जो वर्तमान में समस्या है। उस दृष्टिकोण से देखा जाए तो भीमकुण्ड एक वरदान के रूप में सिद्ध होता है। जहाँ आज धरती पर पानी की कमी हो रही है वहीँ भीमकुण्ड में जल का स्तर प्रभावरहित रहता  है। कहा जाता है कि जब वर्ष 2004 में सुनामी आयी थी। तब इस कुंड में पानी का स्तर बहुत अधिक बढ़ गया था। कुंड में पानी की हलचल से ही पता लग गया था कि कोई आपदा आने वाली है। और इसी के बाद डिस्कवरी चैनल की टीम यहाँ रिसर्च के लिए आयी थी परन्तु इसका कोई हल नहीं निकला।

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पौराणिक कथा 

गोताखोरों ने भीमकुण्ड की गहराई जान्ने के अनेक प्रयास किये परन्तु असफल रहे। कोई भी इस कुंड के तल तक नहीं पहुँच पाया। भीमकुण्ड वैज्ञानिकों के शोध का केंद्र रहा है क्यूंकि आज तक कोई भी इसकी गहराई नहीं नाप सका। इस कुंड का उल्लेख पुराणों में भी मिलता है। कहा जाता है कि अज्ञातवास के समय एक बार भीम को असहनीय प्यास लगी।  कहीं भी पानी न मिलने पर उन्होंने अपनी गदा से एक गड्ढा खोदा जहाँ से पानी निकल आया।  इस कुंड का निर्माण हुआ इसलिए इसे भीमकुण्ड का नाम दिया गया।  साथ ही इसके रहस्य्मयी होने के कारण भी लोग भीमकुण्ड के दर्शन करने ज़रूर आते हैं.

तो क्या आपने भीमकुण्ड के दर्शन किये हैं? यदि हाँ, तो अपना अनुभव नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर हम तक अवश्य पहुंचाएं.

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