सनातन धर्म को विज्ञान पर आधारित माना गया है। आयुर्वेद से लेकर पूजा विधियों तक, सनातन धर्म में ऐसे नियम हैं जो कहीं न कहीं मनुष्य के लिए अवश्य ही लाभकारी सिद्ध होते हैं। यह कहना तो सही नहीं होगा कि हमारे धर्म ग्रंथों की अनेक बातें विज्ञान ने भी सही सिद्ध की हैं। बल्कि यह कहना ठीक होगा की जो आविष्कार या खोज लाखों वर्ष पहले ही किए जा चुके हैं उन पर आज के वैज्ञानिक फिर से रिसर्च कर रहे हैं। और परिणाम बिलकुल वैसे ही हैं। वैज्ञानिक भी अब बहुत सी बातें मान चुके हैं कि हिन्दू धर्म  ग्रंथों में बहुत से आश्चर्यजनक तथ्य हैं। हम आपको बताने जा रहे हैं हिन्दू धर्म की वो बातें जिसे विज्ञान ने खुद साबित की।

घंटी बजाना

हमारे यहाँ पूजा में घंटी बजाना अनिवार्य है। वैसे तो यह धारणा है कि घंटी बजने से ईश्वर तक आपकी प्रार्थना पहुंचती है। परन्तु इसके पीछे कारण यह है जिसे वैज्ञानिक भी मानते हैं। जब घंटी बजायी जाती है तो वातावरण में एक कम्पन उत्पन्न होता है। जो काफी अधिक दूरी तक जाता है और इस क्षेत्र में उपस्थित सभी जीवाणु, विषाणु, सूक्ष्म जीव आदि नष्ट हो जाते हैं। और वातावरण शुद्ध हो जाता है। इसके अतिरिक्त घंटी की ध्वनि मन में भक्ति भाव को जगाती है। इसकी लय से जुड़कर मन को शान्ति प्राप्त होती है। घंटी की ध्वनि मन, मस्तिष्क और शरीर को ऊर्जा और शक्ति प्रदान करती है। मनुष्य को सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार भी घर में घंटी का होना बहुत लाभकारी माना गया है। माना जाता है कि जिस घर में घंटी रहती है वह घर हमेशा बुरी आत्माओं और बुरी शक्तियों से दूर रहता है। इसी कारण लोग घरों के दरवाजों और खि‍ड़कियों पर भी विंड चाइम्स का उपयोग करते हैं। जिससे उसकी ध्वनि से नकारात्मक शक्तियां आप से दूर रहे, क्योंकि नकारात्मक शक्तियां समृद्धि कि द्वार बंद कर देती हैं।

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शंख बजाना

सनातन धर्म में पूजा के समय शंखनाद को शुभ माना गया है। मंदिरों में भी शंख बजाया जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, शंख बजाने से फेफड़े मज़बूत होते हैं।  और श्वास सम्बन्धी रोग नहीं होते। वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि शंख की ध्वनि जहाँ तक जाती है। वहां बीमारियों के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। बर्लिन विश्‍वविद्यालय ने शंखध्वनि पर एक अनुसंधान भी किया है। जिसके अनुसार वैज्ञानिकों ने पाया कि शंख ध्वनि की तरंगें बैक्टीरिया तथा अन्य रोगाणुओं को नष्ट करने के लिए सबसे उत्तम औषधि हैं। शंख में जल भी रखा जाता है और पूजा के पश्चात सभी भक्तों पर प्रोक्षण किया जाता है। इसका कारण यह है की शंख में फास्फोरस, गंधक और कैल्शियम होते हैं।  इनकी मात्रा उस पानी में भी आ जाती है।  इस जल को पीने या छिड़कने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। 

दीपक जलाना

भारतवर्ष में पूजा कि समय अग्नि का हमेशा से ही बहुत महत्त्व रहा है। वेदों में अग्नि को प्रत्यक्ष देवतास्वरूप कहा गया है। पूजा के समय घी का दीप प्रज्ज्वलित करने का बहुत महत्त्व है। वैज्ञानिकों कि अनुसार, गाय के घी में ऐसे गुण पाए जाते हैं जिनसे रोगाणु दूर भागते हैं। साथ ही वातावरण भी शुद्ध और प्रदूषण मुक्त होता है। अग्नि में कोई भी चीज़ छोटे छोटे टुकड़ों में बांटकर वातावरण में फ़ैल जाती है। दीपक के माध्यम से घी का वातावरण में फैलना वातावरण की शुद्धि में बहुत लाभकारी है। 

तिलक लगाना

जब भी पूजा होती है तब मस्तिष्क पर तिलक लगाया जाता है। पूजा में प्रायः हल्दी, चन्दन, रोली आदि का तिलक लगाने का प्रावधान है। वैज्ञानिकों का कहना है की तिलक लगाने का मनोवैज्ञानिक प्रभाव है। इससे व्यक्ति सकारात्मक और आत्मविश्वास अनुभव करता है। तिलक से मस्तिष्क में सेराटोनिन और बीटा एंडोर्फिन का स्राव संतुलित ढंग से होता है। जिससे नकारात्मकता दूर होती है और मन उत्साह से परिपूर्ण रहता है।  तिलक मस्तिष्क को शीतलता प्रदान करता है और मानसिक रोगों को भी दूर रखता है। हल्दी का तिलक लगाने से इसमें उपस्थित एंटी बैक्ट्र‍ियल गुण त्वचा को रोगों से मुक्त करते हैं। 

कपूर जलाना

हिन्दू धर्म में पूजा में कपूर जलाने का वैज्ञानिक कारण है कि इससे वायुमंडल शुद्ध होता है। और जिस स्थान पर कपूर जलाया जाता है नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है।  सकारात्मक तरंगें प्रवेश करती हैं। साथ ही बीमारी कि कीटाणु भी नष्ट होते हैं और रोग पास नहीं आते।  कपूर से कफ, गर्दन में दर्द, आर्थराइटिस या गठिया और मांसपेशियों में खिंचाव जैसे रोग भी नष्ट होते हैं।