राम-सीता

रामायण के सभी पात्र प्रेरणादायक हैं। रामायण का प्रत्येक प्रसंग इसके विषय में आगे की कहानी जानने का उत्साह भर देता है। इसी कड़ी में सीता स्वयंवर की कथा भी  बहुत दिलचस्प है। इस वजह से एक विशेष प्रकार का धनुष तोड़ने वाले राजा से ही सीता जी का स्वयंवर होना था। यह सुनने में तो एक साधारण सी बात प्रतीत होती है। उस समय में स्वयंवर कुछ इसी प्रकार होते थे परन्तु सीता जी के स्वयंवर का धनुष विशेष और रहस्य्मयी था। बहुत से लोग सीता स्वयंवर के विषय में तो जानते हैं परन्तु इस धनुष के विषय में नहीं जानते। तो आइये जानते हैं सीता जी के स्वंयवर में तोडे गए धनुष का रहस्य

शिवजी का धनुष

राजा जनक महादेव शिव के वंशज थे और उनके राजमहल में जो धनुष रखा था वो शिव जी का था। राजा जनक की पुत्री सीता उन्हें धरती से निकले एक मटके से प्राप्त हुई थीं।  इसलिए उनका एक नाम भूमिजा भी है।  जब जनक ने अपनी पुत्री भूमिजा के स्वयंवर की घोषणा की तो शर्त रखी कि स्वयंवर में उपस्थित जो भी राजा जनक के महल में रखे धनुष की प्रत्यंचा को चढ़ा देगा उससे ही सीता का विवाह होगा। मित्रों यह धनुष बहुत ही उच्च श्रेणी की तकनीक से बनाया गया था। . कहा जाता है यह उस समय की परमाणु मिसाइल या ब्रह्मास्त्र छोड़ने का यंत्र था।

रावण और शिवधनुष

अब यह तो आप जानते ही हैं कि रावण बहुत ही योग्य, ग्यानी और शिव जी का शुद्ध भक्त था। उसकी दृष्टि शिव जी के इस धनुष पर थी और उसे पूरा विश्वास था कि शिव भक्त होने के कारण वो प्रत्यंचा चढ़ाने में सफल रहेगा। परन्तु यदि यह धनुष रावण जैसे विनाशकारी व्यक्ति के पास चला जाता तो वो विनाश को परिणाम देता। इस धनुष को प्रयोग करने की विधि केवल चार लोगों को ज्ञात थी: राजा जनक, उनकी पुत्री सीता, आचार्य विश्वामित्र और भगवान् परशुराम।

यह भी पढ़ें -रामायण से जुड़े 21 रोचक तथ्य

सीता-राम विवाह

यह शक्तिशाली धनुष रावण के पास न पहुंचे इसलिए विश्वामित्र ने श्री राम को पहले ही इस धनुष को चलाने की विधि बताई। परन्तु जब श्री राम से वो धनुष टूट गया तो परशुराम को बहुत क्रोध आया। तब विश्वामित्र ने समझाया कि यह श्री राम कि त्रुटि से नहीं अपितु बहुत प्राचीन होने के कारण टूटा है। यह सुनकर परशुराम का क्रोध शांत हुआ। और मित्रों इस प्रकार इस धनुष का विनाश भगवान् राम द्वारा किया गया और श्री राम और माता सीता का विवाह संपन्न हुआ। 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here