इस पोस्ट में हम बात करेंगे  त्रेता युग के भगवान विष्णु के अवतारों के बारे में। त्रेतायुग में भगवान विष्णु के वामन,परशुराम और राम तीन अवतार हुए थे।

वामन अवतार

वामन भगवान विष्णु के पांचवें तथा त्रेतायुग के प्रथम अवतार थे। जब प्रहलाद पौत्र राजा बली ने जो दैत्यों का राजा था स्वर्गलोक पर अधिकार कर लिया। तब सभी देवता रक्षा के लिए भगवान विष्णु के समक्ष पहुंचे। भगवान विष्णु ने देवताओं को आश्वासन दिया की वो देवमाता अदिति के गर्भ से उत्पन्न होकर उन्हें स्वर्ग का राज वापस दिलाएंगे। इसके कुछ समय पश्चात भगवान ने वामन अवतार लिया। एक बार राजा बली ने एक बहुत बड़े यज्ञ का आयोजन किया। बलि को बहुत बड़े दानी के रूप में जाना जाता था। भगवान वामन ने बली से दान माँगा जिसमे तीन पग धरती दान में मांगी गई। राजा बली के गुरु शुक्राचार्य भगवान की इस लीला को समझ गए थे। उन्होंने बली को दान देने से मना किया। परन्तु फिर भी बली ने तीन पग धरती दान करने का वचन दिया। 

तब भगवान ने एक पग में धरती और दूसरे में स्वर्गलोक को नाप लिया। जब तीसरा पग रखने के लिए स्थान ही नहीं बचा तो बली ने स्वंय अपना सिर आगे रखकर कहा -आप तीसरा पग यहाँ रख दें। उसके बाद जब भगवान ने बली के सिर पर पग रखा पाताललोक पहुँच गया। बली की दान देने की भावना को देखकर भगवान ने उसे पाताललोक का स्वामी घोषित कर दिया। और इस प्रकार भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर देवताओं को स्वर्गलोक वापस लौटाया।  

परशुराम अवतार

भगवान विष्णु के छठे और त्रेतायुग में दूसरे अवतार परशुराम के रूप में प्रकट हुए। इस अवतार की कथा के अनुसार पुरातन समय में महिष्मति नगरी पर शक्तिशाली क्षत्रिय सहस्त्रबाहु का शासन था। वह अत्यंत अत्याचारी और अभिमानी था। एक बार अग्निदेव ने उससे आग्रह किया की वो उन्हें भोजन करा दे। तब अभिमान में आकर सहस्त्रबाहु ने उत्तर दिया -हर ओर मेरा ही राज्य है। आप जहाँ चाहें वहां से भोजन प्राप्त कर सकते हैं। यह सुन अग्निदेव खुद को अपमानित महसूस करने लगे। और उन्होंने वनो को जलाना आरम्भ कर दिया।

इन्ही वनो में से एक वन में ऋषि आपव तपस्या कर रहे थे। उनका आश्रम भी जल चूका था। तब क्रोध में आकर ऋषि आपव ने सहस्त्रबाहु को श्राप दिया की ना केवल सहस्त्रबाहु अपितु सभी क्षत्रिय का विनाश करने के लिए स्वंय भगवान विष्णु परशुराम के रूप में अवतार लेंगे। और इस प्रकार भगवान विष्णु ने भार्गव कुल में महर्षि जमदग्नि के पांचवे पुत्र परशुराम के रूप में अवतार लिया।

राम अवतार

भगवान विष्णु के सातवें और त्रेता युग के तीसरे अवतार थे भगवान राम। भगवान राम की कथा से तो हम सभी परिचित हैं। त्रेतायुग में राक्षस राज रावण के आतंक से सभी देवता भयभीत थे। रावण का वध करने के लिए भगवान विष्णु ने राजा दशरथ और रानी कौशल्या के पुत्र के रूप में जन्म लिया। इस अवतार में भगवान ने धर्म और मर्यादा के मार्ग पर चलते हुए जीवन व्यतीत किया। और इस प्रकार भगवान विष्णु ने तीन अवतार लिए।

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