जानिए गणेश जी का असली मस्तक कटने के बाद कहां गया

जानिए गणेश जी का असली मस्तक कटने के बाद कहां गया

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जानिए गणेश जी का असली मस्तक कटने के बाद कहां गया? दर्शकों जैसा की हम सभी जानते हैं कि हिन्दू धर्म में जब भी कोई शुभ आरम्भ कार्य किया जाता है तो सबसे पहले भगवान शंकर और माता पारवती के गजानन यानि गणेश जी की पूजा की जाती है उसके बाद ही अन्य किसी देवता की पूजा की जाती है। और यही वजह है कि भगवान गणेश को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। दोस्तों हम सभी जो अभी गणेश जी का गजानन स्वरुप देखते हैं उससे जुडी कथा के बारे में तो सभी जानते हैं कि गणपति का सर उनके धड़ से अलग हो गया था। जिसके बाद हाथी के बच्चे का सिर काटकर उनके धड़ से जोड़ा गया। लेकिन दोस्तों क्या आप जानते हैं की गणेश जी का असली सर धड़ से अलग होने के बाद कहाँ गया और आज के समय में वह कहाँ हैं अगर नहीं तो अंत तक हमारे साथ बने रहें।

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गणेश जी का असली मस्तक कटने के बाद कहां गया? शिवपुराण में वर्णित कथा के अनुसार भगवान श्री गणेश जी का जन्म माता पार्वती के मैल से हुआ था। ऐसा माना जाता है कि माता पार्वती ने सबसे पहले अपने शरीर के मैल से एक बालक का पुतला बनाया और फिर उसमे जान डाल दिया। परन्तु उस समय भगवान शिव कैलाश पर उपस्थित नहीं थे। बालक रुपी पुतले में प्राण फूंकने के बाद माता पार्वती ने स्नानं करने को जाने लगी और उन्होंने उस बालक से कहा हे वत्स मैं स्नान करने जा रही हूँ तुम द्वार पर खड़े होकर रखवाली करो और मेरी आज्ञा के बिना किसी को भी अंदर मत आने देना। इतना कहकर माता पार्वती स्नानागार में चली गई। उधर कुछ समय बाद भगवान शंकर लौट कर आये और माता पार्वती के भवान में जाने लगे परन्तु बाल गणेश ने भगवान शंकर को अंदर जाने से रोक दिया।यह देख भगवान शिव विस्मित हो गए और उन्होंने उस बालक से पूछा तुम कौन हो तब श्री गणेश ने कहा मैं माता पारवती का पुत्र गणेश हूँ और उनका आदेश है की उनकी आज्ञा के बिना मैं किसी को अंदर नहीं जाने दूँ। यह सुनकर भगवान शंकर ने उस बालक को बहुत समझाने का प्रयत्न किय परन्तु वह बालक नहीं माना तब क्रोध के आवेश में आकर भगवान शिव ने उस बालक का सिर धड़ से अलग कर दिया भीतर चले गए। उधर माता पार्वती को जब गणेश के वध की सूचना मिली तो वह क्रोधित होकर विलाप करने लगी जिससे तिनोलोकों में हाहाकार मच गया। तब माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव ने एक हाथी के बच्चे का सिर काटकर उस बालक के धड़ से जोड़ दिया। और उसे पुनः जीवित कर दिया। और ऐसा माना जाता है की भगवान गणेश तभी से गजानन कहलाने लगे।

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गणेश जी का असली मस्तक कटने के बाद कहां गया? वहीँ एक दूसरी कथा के अनुसार जब भगवान गणेश का जन्म हुआ तो कैलाश पर्वत पर उत्सव मनाया जा रहा था। उस उत्सव में सभी देवता बाल गणेश को आशीर्वाद देने के लिए शिवधाम पधारे थे। परन्तु शनि देव कैल्श तो आये लेकिन गणपति को देखे बिना ही वहां से जाने लगे यह देख देख माता पार्वती को क्रोध आ गया और उन्होंने शनि देव से इसका कारण पूछा। तत्पश्चात शनि देव ने कहा कि अगर उनकी दृष्टि गणेश पर पड़ी तो अमंगल हो जायेगा लेकिन माता पार्वति नहीं मानी और उन्हें गणेश को देखने का आदेश दे दिया। फिर जैसे ही शनि ने गणेश को देख उनका सिर कटकर हवा में विलीन हो गया। गणपति जमीन पर गिर गए और माता पार्वती बेहोश हो गई। इसके बाद भगवान विष्णु ने एक नवजात हाथी का सिर काटकर गणेश जी के धड़ से जोड़ दिया।

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ये तो हो गयी भगवान गणेश के जन्म और उनके धड से सिर अलग होने की कथा आइये अब जानते हैं की आखिर भगवान गणेश का वास्तविक सिर कहाँ गया ? धर्मज्ञों की माने तो भगवान गणेश का असली सिर धड़ से अलग होने पर भगवान शिव ने उसे एक गुफा में रख दिया। इस गुफा को आज पाताल भुवनेश्‍वर गुफा के नाम से जाना जाता है। इस गुफा में विराजित गणेशजी की मूर्ति को आदि गणेश कहा जाता है। वर्तमान यह गुफा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट से 14 किलोमीटर दूर पर स्थित है। मान्‍यता है कि इस गुफा में रखे गणेश के कटे हुए सिर की रक्षा स्‍वयं भगवान श‍िव करते हैं।

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